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गोरखपुर में लॉकडाउन के दौरान नॉर्मल डिलीवरी हुई ज्यादा, यहां मौजूद हैं सारे आंकड़ें

Tue, 09 Jun 2020 10:25 AM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।

सार

  • निजी अस्पताल रहे बंद, सरकारी महिला अस्पताल में आधे से ज्यादा डिलीवरी नार्मल
  • ग्रामीण क्षेत्र में घरों में बड़ी संख्या में दाइयों ने कराई नॉर्मल डिलीवरी
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- फोटो : डेमो
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विस्तार
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लॉकडाउन में ऑपरेशन से प्रसव (सिजेरियन) की संख्या अपेक्षाकृत काफी कम रही है। इस दौरान प्रसव महिला अस्पताल में हुए या घरों में। निजी अस्पताल पूरी तरह से बंद थे। जाहिर है कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन की बढ़ती प्रवृत्ति पर इन आंकड़ों के हवाले से अंगुली जरूर उठेगी। सवाल होगा कि क्या ऑपरेशन से प्रसव के मामलों में गर्भवती महिलाओं को वाकई इसकी जरूरत होती है, या इसके पीछे कोई और मंशा काम करती है?

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जैसा कि ज्यादातर लोग जानते हैं कि पिछले कुछ सालों में सिजेरियन की प्रवृत्ति काफी बढ़ी है और इसको लेकर अक्सर निजी अस्पतालों पर जब-तब अंगुली भी उठती रहती है। 23 मार्च से हुए लॉकडाउन का सिलसिला सात जून तक चला।

लॉकडाउन-3 में कुछ निजी अस्पतालों को इलाज की मंजूरी दी गई। लेकिन, इससे पूर्व केवल सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी इलाज की मंजूरी थी।  इस बीच अस्पतालों में डिलीवरी के मामले कम आए जो आए भी उनमें कम ही ऐसे थे जिनकी प्रसव आपरेशन से हुआ।
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दरअसल, ग्रामीण इलाकों में लोगों ने घरों में ही प्रसव को तरजीह दी। जाहिर है कि घरों में हुए प्रसव सामान्य ही होंगे। महिला अस्पताल में भी ज्यादातर प्रसव सामान्य रहे। आंकड़ों में बात करें तो करीब 60-62 प्रतिशत के बीच नॉर्मल, जबकि 40-42 प्रतिशत के बीच सिजेरियन डिलीवरी हुई है।

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गांव में पुराने तरीके से कराई गई डिलीवरी

महिला अस्पताल के एसआईसी डॉ आनंद श्रीवास्तव ने बताया कि आम दिनों की अपेक्षा लॉकडाउन के दौरान जिला अस्पताल में प्रसव के मामले कम आए। गांव में पुराने तरीके से दाइयों ने डिलीवरी कराई है। जिला अस्पताल में पहली प्राथमिकता नॉर्मल डिलीवरी की होती है। जरूरत पर ही सिजेरियन कराई जाती है।

सीजेरियन के पीछे कहीं यह तो नहीं वजह
निजी अस्पतालों की बात करें तो सिजेरियन डिलीवरी के नाम पर 15 हजार से लेकर 70 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। बड़े अस्पतालों का खर्चा तो एक लाख रुपये तक पहुंच जाता है।
  • महिला अस्पताल में लॉकडाउन के दौरान नॉर्मल और सिजेरियन डिलीवरी के आंकड़े
  • लॉकडाउन पार्ट-वन (24 मार्च से 13 अप्रैल) में नॉर्मल डिलीवरी 208, सिजेरियन-97
  • लॉकडाउन पार्ट-टू(14 अप्रैल से 03 मई) में नॉर्मल डिलीवरी 173, सिजेरियन-77
  • लॉकडाउन पार्ट-थ्री(चार से 17 मई) में नॉर्मल डिलीवरी 137, सिजेरियन-64
  • लॉकडाउन पार्ट-चार(18 मई से 31 मई) में नॉर्मल डिलीवरी 109, सिजेरियन-69
  • 24 मार्च से 31 मई के बीच कुल नॉर्मल डिलीवरी 642, सिजेरियन-308

आईएमए अध्यक्ष डॉ एससी कौशिक ने कहा कि निजी अस्पताल में आने वाले डिलीवरी के केस पर निर्भर होता है उसकी स्थिति नॉर्मल की है या सिजेरियन की। उसी अनुसार डॉक्टर प्रसव कराता है। लॉकडाउन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट नहीं मिला। इसकी वजह से केस निजी अस्पताल तक नहीं आए। ऐसे में सही आंकड़े कुछ समय बाद ही पता चल सकेंगे।  
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