अंदर गए तो देखा कि दो सीट के बीच की खाली जगह में तमाम यात्री चादर बिछाकर सो रहे थे। मैं भी उसी में किसी तरह से बैठकर आ गया। राम मिलन सिंह का कहना था कि अभी तो राहत है, आगे और भीड़ बढ़ेगी, इसलिए जहां टिकट मिला वहीं बैठ गए।
जनरल बोगी की हालत तो वैसे ही खराब रहती है। इस बोगी में आए बिजेंद्र ने बताया कि बस्ती का एक यात्री दिल्ली से पहले शकूरबस्ती में ट्रेन में सवार हुआ था। भीड़ के दबाव के चलते वह चिल्लाने लगा। दिल्ली स्टेशन पर उसे यात्रियों ने बाहर निकाल दिया।
इसे भी पढ़ें: फर्जी पैरामेडिकल कॉलेज की जांच को बंगाल जाएगी गोरखपुर पुलिस, 800 छात्रों के साथ हुई जालसाजी
सिसवा बाजार मनीष ने कहा कि दिवाली से एक दिन पहले का टिकट लिया था, लेकिन सीट कंफर्म नहीं थी। कोई उपाय नहीं सूझा तो 10 दिन पहले ही निकल लिए। कम से कम त्योहार में सकुशल घर तो पहुंच जाएंगे। बहुत से लोग सात तारीख के बाद यात्रा शुरू करेंगे। तब भीड़ और बढ़ेगी।
खड्डा अरसे आलम ने कहा कि अब स्लीपर कोच में भी बैठने की जगह नहीं मिल रही है। थर्ड एसी में भी लोग वेटिंग का टिकट लेकर चल रहे हैं। जनरल बोगी में तो दम घुट जाएगा, इतनी भीड़ है। मौके को देखते हुए रेलवे को एसी डिब्बों की जगह सामान्य डिब्बों वाली विशेष गाड़ी चलानी चाहिए, जिससे कि आम आदमी को राहत मिल सके।