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खुशखबर: रामगढ़ताल किनारे पहले से बना कोई निर्माण नहीं टूटेगा, यहां नहीं कर सकेंगे कोई काम

Sat, 19 Sep 2020 09:49 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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रामगढ़ ताल। - फोटो : अमर उजाला।
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 नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की तरफ से राहत मिली तो शासन-प्रशासन, रामगढ़ताल ताल के किनारे बने किसी भी निर्माण को नहीं तोड़ेगा। वेट लैंड नोटिफिकेशन जारी होने की तिथि से इस दायरे में कोई नया निर्माण नहीं कराया जा सकेगा। अगर किसी ने वेट लैंड नियमों की अनदेखी कर निर्माण कराया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। पहले से बने निर्माण नहीं तोड़े जाएंगे। फिलहाल वेटलैंड नोटिफिकेशन का जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें कहीं पर भी कोई निर्माण नहीं है।

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दरअसल, रामगढ़ताल वेटलैंड के दायरे को लेकर मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) में भी चल रहा है। एनजीटी की हाई पावर कमेटी ने पिछले साल, ताल के 500 मीटर दायरे में हुए सभी निर्माणों को ध्वस्त करने की संस्तुति की थी। कमेटी की संस्तुति के खिलाफ जीडीए ने भी प्रमुख सचिव सिंचाई के माध्यम से ट्रिब्यूनल में अपना पक्ष रखा है। अभी इस मामले में कोई आदेश नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों के मुताबिक रामगढ़ताल वेटलैंड का नोटिफिकेशन हो जाने के बाद ट्रिब्यूनल में ताल के 500 मीटर के दायरे में आ रहे निर्माण को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि एनजीटी का फैसला आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।  फिलहाल, शासन-प्रशासन की तरफ से ताल किनारे बसे लोगों को कोई खतरा नहीं रह गया है।  
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डीएम ने क्या कहा

डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने कहा कि रामगढ़ताल वेट लैंड के निर्धारण के लिए जो प्रस्ताव तैयार किया गया है उसमें वेट लैंड एरिया में कहीं पर कोई निर्माण नहीं है। निर्माण छोड़ते हुए ही वेट लैंड एरिया तय किया गया है। मामला एनजीटी में भी चल रहा है। 

एनजीटी से कोई कार्रवाई नही होती है तो किसी भी तरह के पुराने निर्माण को कोई दिक्कत नहीं होगी। हालांकि वेट लैंड नोटिफिकेशन हो जाने के बाद उसकी रिपोर्ट एनजीटी में पेश की जाएगी। उम्मीद है नोटिफिकेशन से बड़ी राहत मिलेगी। इससे जीडीए की लोहिया योजना के आवंटियों को भी कब्जा देने की राह आसान हो जाएगी। फाइनल नोटिफिकेशन की तिथि से अगर कोई वेट लैंड दायरे में निर्माण कराता है तो उसे ध्वस्त कराया जाएगा।
 
टल सकता है तोड़ने का खतरा
जीडीए के सर्वे  रिपोर्ट के मुताबिक 500 मीटर के दायरे में करीब 10 हजार मकान हैं। करीब पांच हजार घर तो जीडीए के ही हैं। 500 के करीब ऊंची इमारतें हैं ।  350 निर्माण तो ऐसे हैं, जो 50 मीटर के ही दायरे में हैं। ऐसे में वेट लैंड के दायरे में कोई निर्माण नहीं होने व ज्यादातर जगहों पर दायरा 50 मीटर होने से इन परिवारों को राहत की उम्मीद मिलने की संभावना बढ़ गई है।  

इसी महीने राज्य आद्रभूमि प्राधिकरण कर सकता है समीक्षा
रामगढ़तला वेटलैंड को लेकर 15 जून को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी।  प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण ने लोगों को दावे एवं आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 जून तक का मौका दिया था। इस दौरान करीब  206 दावे और आपत्तियां मिली थीं। डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण ने सभी की सुनवाई के बाद अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है। 30 सितंबर तक प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के रिपोर्ट की समीक्षा कर लेने की उम्मीद है।

 
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ताल के आसपास इन कामों पर लगेगी रोक

इस प्राधिकरण की मंजूरी के बाद रिपोर्ट फिर से जिला आर्द्रभूमि प्राधिकरण को भेजी जाएगी। जिला आद्रभूमि प्राधिकरण अंतिम अधिसूचना का ड्राफ्ट तैयार कर फिर शासन को भेजेगा। न्याय विभाग होते हुए यह ड्राफ्ट अंतिम प्रकाशन के लिए राज्यपाल के पास जाएगा। इसके बाद ताल के वेटलैंड का अंतिम प्रकाशन होगा।

अधिसूचना के बाद झील के निर्धारित दायरे में कोई नया उद्योग नहीं लग सकता। पुरानी इकाइयों के विस्तार पर भी रोक होगी। इस दायरे में खतरनाक किस्म के कचरे, पॉलीथिन, नान बायोग्रेडिबल ठोस कचरे, गंदा पानी, अशोधित सीवेज कजे निस्तारण पर भी रोक होगी। नौकायन के लिए जेट्टी को छोड़कर किसी तरह के निर्माण पर रोक होगी। बंधे का निर्माण, मछली पालन, सिंघाड़े की खेती, सड़क निर्माण आदि की गतिविधियों को डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति काम करेगी।
 
आपत्तियों का निस्तारण, वेटलैंड का दायरा तय
रामगढ़ताल वेटलैंड की प्रारंभिक अधिसूचना पर 206 लोगों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। सभी का निस्तारण कर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन की अध्यक्षता वाली जिला आद्रभूमि प्राधिकरण ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है। जल्द ही फाइनल प्रकाशन हो जाने की उम्मीद है।
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