विजेंद्र के साथ थावे के सरजू यादव भी थे, जिन्हें गोरखपुर उतरकर यहां से कुशीनगर के रास्ते घर जाना है। छठ के दिन घर में कोशी भरी जानी है, जिसके लिए साड़ी-कपड़े व अन्य सामान खरीदकर चले थे। सारा सामान कोच में ही जल गया। सरजू का कहना था कि छठी मइया की कृपा से जान बच गई, यही बड़ी बात है।
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करीब ढाई घंटे विलंब हो गई ट्रेन
हादसे के चलते यह ट्रेन करीब ढाई घंटे की देरी से चली। इसे गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर रात करीब 12.45 बजे पहुंचना था, लेकिन अब इसके रात में करीब साढ़े तीन बजे पहुंचने की उम्मीद है।