जिंदगी फाउंडेशन की मदद से छात्रों को नीट में मिली सफलता।
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जिंदगी फाउंडेशन की देखरेख में नीट की तैयारी करने वाले 18 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। सब कमजोर तबके से जुड़े हैं। दूध विक्रेता, किसान व मजदूर का बेटा भी अब डॉक्टर बन सकेगा। इन सबकी पढ़ाई व रहने-खाने का खर्च शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता अजय बहादुर सिंह ने उठाया है। वह 2017 से ही कमजोर तबके के मेधावियों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करा रहे हैं।
गोरखपुर आए अजय बहादुर सिंह ने सोमवार को बताया कि दिहाड़ी मजदूर, सड़क किनारे रहकर जिंदगी बिताने वाले लोग, दूध विक्रेता के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। अभी ओडिशा में जिंदगी फाउंडेशन के जरिये प्रतियोगी परीक्षा कराई है। गोरखपुर में भी इस तरह के प्रयास करने हैं।
उनका कहना है कि खुद डॉक्टर बनना चाहता था लेकिन ऐसा न हो सका। अब गरीबों व बेसहारों को शिक्षित करके डॉक्टर बना रहा हूं। इससे आत्मसंतुष्टि मिलती है। नीट में गरीब मेधावियों ने झंडा गाड़ा है। 18 विद्यार्थियों का बैच प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, इस सबका चयन हो गया है। सबको 720 में से अच्छे मार्क्स मिले हैं।
इन्हें मिली सफलता
प्राइवेट नौकरी करने वाले के बेटे सुनील कुमार साहू (स्कोर 675), भूमिहीन किसान के बेटे चंदन शंखुआ (स्कोर 642), दूध विक्रेता के बेटे सुभाष चंद्र बेहरा (स्कोर -630), किसान के बेटे सत्य प्रकाश बेहेरा (स्कोर 620) और दिहाड़ी मजदूर के बेटे प्रिय रंजन नायक (स्कोर - 620), रिक्शा चालाक के बेटे मुर्शिद खान (स्कोर -610), भूमिहीन किसान के बेटे राधा बल्लव बेहेरा (स्कोर - 595), दिहाड़ी मजदूर के बेटे प्रदीप्त सुंदर साहू (स्कोर-595), दिहाड़ी मजदूर के बेटे दया सागर स्वाइन (स्कोर-591), बुनकर की बेटी शिवानी मेहर (577)।