सोनौली हाईवे से बालापार टिकरिया रोड के ओंकारनगर में बन रहे ओवरब्रिज का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। अब रेलवे ट्रैक पर होने वाले निर्माण के लिए भी बजट आवंटित हो गया है। रेलवे के हिस्से का काम पूरा होते ही ओवरब्रिज चालू हो जाएगा।
ओंकारनगर महुआतर रेलवे गेट पर ओवरब्रिज काम दिसंबर 2021 में 84.57 करोड़ की लागत से शुरू हुआ था। इसे दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
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निर्माणाधीन नकहा ओवरब्रिज
- फोटो : अमर उजाला।
नकहा जंगल क्राॅसिंग पर इस वक्त 6 लाइनें हैं, जिसमें से दो लाइनों पर पैसेंजर व एक्सप्रेस ट्रेनें व बाकी चार पर मालगाड़ियों का संचालन होता है। इसके अलावा अभी दो और नई लाइन बिछाई जा रही है। इस क्राॅसिंग पर बैरियर का ऐसा जाल है कि पहली बार उधर से गुजरा आदमी ये देखकर ही चकरा जाएगा कि जाना किधर है और रुकना किधर।
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बरगदवां की तरफ से पहली दो लाइनें नकहां जंगल स्टेशन की मेन लाइन व लूप लाइन है। इसके बाद दो लाइन मालगाड़ी की शंटिंग लाइन है। इसके बाद दो लाइन खाद कारखाने में जाती है। इन्हीं लाइनों के बीच चिलुआताल थाने की तरफ जाने वाले रास्ते का गेट है। एक रास्ता फर्टिलाइजर की तरफ भी जाता है। इसके अलावा स्पोर्ट्स कॉलेज की तरफ से आने वाले रास्ता भी यहीं आकर मिलता है। इन सभी के बीच में बैरियर है।
ट्रकों की आवाजाही से उड़ती धूल और क्राॅसिंग का यह जाल राहगीरों के लिए मुसीबत है। रविवार की शाम करीब पांच बजे बंद क्राॅसिंग पर खड़े सुभाष गुप्ता ने बताया कि एचयूआरएल की तरफ जाने के लिए एक मालगाड़ी पहले शंटिंग लाइन में आई, तभी सभी छह क्राॅसिंग बंद कर दिए गए। इसके बाद यह मालगाड़ी दूसरी पटरी पर गई। करीब आधे घंटे से क्रासिंग बंद है। मेडिकल कॉलेज जाना है, इस रास्ते नहीं गए तो गोरखनाथ मंदिर के सामने से होकर आना पड़ेगा।
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बाइक सवार बृजेश बोल पड़े-छह महीने हो गए, यहां की धूल फांकते। न तो निर्माण कार्य खत्म हुआ और न ही धूल से निजात मिली। ट्रकों की आवाजाही और फाटक गिरने-उठने का यह क्रम न जाने कब बंद होगा। बगल के मोहल्ले में रहने वाले राधेश्याम का दर्द यह है कि क्राॅसिंग निर्माण का कार्य अपूर्ण होने के चलते हर दिन जाम लगा रहता है, जिससे घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। मेडिकल कॉलेज रोड की तरफ जाने के लिए कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।