अलग-अलग मामलों में रील बनाकर अपने दबंग लुक को दिखाते शशांक की आईडी
- फोटो : स्त्रोत- एसटीएफ सूत्र
असलहा सप्लाई करने वाले गैंग के सक्रिय गुर्गे मनीष यादव को गोरखपुर एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था। पूछताछ में मनीष ने बताया था कि गैंग से उसका जुड़ाव शशांक ने करवाया था। सूत्रों की मानें तो मुंबई में हत्या किए जाने के बाद और अन्य कुछ नाम सामने आने पर मुंबई पुलिस ने फायरिंग से जुड़ी फाइलों को भी खंगाला है। इसमें शशांक का नाम सामने आया।
मुंबई पुलिस ने तफ्तीश की तो शशांक कुछ दिनों पहले जमानत पर जेल से छूटकर बाहर आया था। ऐसे में मुंबई पुलिस ने गोरखपुर एसटीएफ से भी शशांक के पूरे नेटवर्क को खंगालने और पिछले छह महीने में उसके संपर्क में आए लोगों की सूची मांगी है। शशांक से जुड़ी सूचनाएं अगले 48 घंटे के भीतर एसटीएफ मुंबई पुलिस को सौंप देगी।
जमानत पर छूटा, गोरखपुर भी आया था शशांक
पिछले दिनों जेल से छूटे एक सूत्र ने बताया कि तकरीबन 20 दिन पहले शशांक पांडेय गोरखपुर आया था। इस दौरान रानीडीहा और तारामंडल इलाके में शशांक का आना-जाना भी रहा। सूत्रों की मानें तो एसटीएफ के पास भी शशांक के जेल से छूटने और बाहर आने की जानकारी नहीं है। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि नंदानगर, सिंघड़िया, आदर्शनगर और तारामंडल के 10 मनबढ़ युवाओं की सूची एसटीएफ ने तैयार की है।
हरियाणा जेल में आर्म्स एक्ट में था बंद शशांक
एसटीएफ ने पिछले दिनों गोरखपुर के चिलुआताल इलाके के रामलीला मैदान के पास से शशांक पांडेय को गिरफ्तार किया था। गोरखपुर एसटीएफ और अंबाला एसटीएफ ने संयुक्त अभियान में ये गिरफ्तारी की थी। उसके खिलाफ हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद थाने में वर्ष 2023 में आर्म्स एक्ट का केस दर्ज है। लॉरेंस बिश्नोई गैंग को शशांक असलहे सप्लाई करता था, इसी आरोप में उसे हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
इंटररेट के जरिए तलाशते हैं नए गुर्गे
एसटीएफ सूत्रों की मानें तो लॉरेंस ने अपना इंटरनेट मीडिया विंग बना रखा है। शशांक पांडेय पूर्वांचल में इस विंग को संभालता करता है। फेसबुक व इंस्टाग्राम पर लॉरेंस नाम के दर्जनों पेज बना रखे हैं, जिसके जरिये गुर्गे ऑनलाइन भर्ती के लिए ऐसे युवाओं की तलाश करते हैं। लोकल जुड़ाव होने की वजह से ये जुड़ते चले जाते हैं।