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नशीली दवाओं का कारोबार: स्वास्थ्य विभाग के निशाने पर 30 से अधिक निजी अस्पताल, सूची बनकर तैयार

Fri, 12 Aug 2022 12:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

आईएमए भी इस तरह के अस्पतालों का विरोध मौखिक रूप से करता रहा है। लेकिन, लिखित तौर पर इनकी सूची आज तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं सौंपी। जबकि, स्वास्थ्य विभाग कई बार सूची मांग चुका है।

 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गोरखपुर शहर के 30 से अधिक निजी अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के निशाने पर हैं। ये ऐसे अस्पताल हैं, जो मानकों को दर किनार कर चलाए जा रहे हैं। साथ ही मरीजों से इलाज के नाम पर धन उगाही करते हैं। ऐसे अस्पतालों की सूची स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर से तैयार की है। इनमें सबसे अधिक तारामंडल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज क्षेत्र के अस्पताल शामिल हैं।

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जानकारी के मुताबिक, ये ऐसे अस्पताल हैं, जो एंबुलेंस चालक, हाईस्कूल फेल जैसे लोग चला रहे हैं। इनके बोर्ड पर वेंटिलेटर की सुविधा से लेकर एनआईसीयू, पीडियाट्रिक आईसीयू लिखे हुए हैं।

इतना ही नहीं इन अस्पतालों का रजिस्ट्रेशन भी ऐसे डॉक्टरों के नाम से हैं, जो शहर में रहते ही नहीं है। ऐसे अस्पताल संचालक मरीजों और उनके परिजनों से मनमाना शुल्क वसूलते हैं। बिचौलिया और एंबुलेंस चालक को प्रति मरीज 20 से 25 हजार रुपये बतौर कमीशन देते हैं।
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ऐसे अस्पतालों के नाम भी विभाग के सामने आए हैं, जिनके बोर्ड पर तमाम डॉक्टरों के नाम लिखे गए हैं, लेकिन डॉक्टर अस्पतालों में इलाज के लिए नहीं आते हैं।

 

मरीजों का कर रहे शारीरिक और आर्थिक शोषण
ये निजी अस्पताल मरीजों और उनके तीमारदारों की जेब खाली करने के साथ उन्हें शारीरिक रूप से भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। बिना डिग्री वाले मरीजों की जान भी ले रहे हैं। एक सप्ताह के अंदर ऐसे दो मरीजों की मौत भी हुई है, जिनका ऑपरेशन बिना डिग्री वाले ने किया था।

पहले पीआरओ थे, अब खोल लिया निजी अस्पताल
तारामंडल और बीआरडी क्षेत्र में, जो निजी अस्पताल चला रहे हैं उनमें अधिकतर पहले शहर के निजी अस्पतालों के मैनेजर और पीआरओ का काम देखते थे। अब यह लोग निजी अस्पताल चलाकर मरीजों का शोषण करने में जुट गए हैं। इस काम में शहर के कई बीएचएमएस डॉक्टर भी शामिल हैं, जिनकी शह पर अस्पताल चल रहे हैं।

आईएमए केवल मौखिक रूप से करता रहा शिकायत
आईएमए भी इस तरह के अस्पतालों का विरोध मौखिक रूप से करता रहा है। लेकिन, लिखित तौर पर इनकी सूची आज तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं सौंपी। जबकि, स्वास्थ्य विभाग कई बार सूची मांग चुका है।

 
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आईएमए अपने पदाधिकारियों और सदस्यों के यहां लगवा चुका है बोर्ड
अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों को संज्ञान में लेते हुए आईएमए अपने पदाधिकारियों और सदस्यों के यहां आईएमए प्रमाणित बोर्ड लगवा चुका है, जिससे की मरीज शोषण का शिकार न हो सके। इसके लिए आईएमए ने हाल में ही अभियान भी चलाया था।

18 अस्पतालों पर हो चुकी है कार्रवाई
विभाग इस साल अब तक बिना डिग्री के इलाज करने वाले 18 लोगों पर कार्रवाई कर चुका है। इनमें कई ऐसे बिना डिग्री वाले हैं, जिन्होंने मरीजों की जान तक ले ली है। इसके अलावा दो माह पहले पूर्व डीएम विजय किरन आनंद के निर्देश पर 25 अस्पतालों की जांच कर कार्रवाई की गई थी। इन अस्पतालों में काफी अनियमितता मिली थी।

शहर में अवैध रूप से चलने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया गया है। इस काम में पुलिस की भी मदद ली जा रही है। जांच में कमी मिलने पर तत्काल अस्पतालों को सील करते हुए नोटिस भेजा जा रहा है। एक सप्ताह के अंदर चार अस्पतालों को सील किया गया है। - डॉ आशुतोष कुमार दुबे, सीएमओ।
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