विवि प्रशासन ने शिक्षकों और कर्मचारियों के जवाब का परीक्षण करने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। जिसका अध्यक्ष राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राम अचल सिंह बनाया गया है। जबकि, मोती लाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के प्रो. राजीव त्रिपाठी एवं एसके अग्रवाल को बतौर सदस्य रखा गया है।
एमएमएमयूटी कुलसचिव प्रो. जय प्रकाश ने कहा कि बीटके में हुए फर्जी प्रवेश के मामले में जांच रिपोर्ट को कार्य परिषद के सामने रखा गया। जिसमें प्रथमदृष्टया लापरवाही बरतने वाले शिक्षक-कर्मचारियों को नोटिस देकर सात दिनों में जवाब मांगा गया है। जवाब को गुण-दोष के आधार पर परीक्षण के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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विश्वविद्यालय में सितंबर-2022 में बीटेक की कक्षाओं में फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रवेश लेने का मामला सामने आया था। शक के आधार पर कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। कमेटी में अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. राम अचल सिंह के अलावा विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय व प्रो. पीके सिंह को रखा गया। जांच में कमेटी को 40 छात्र ऐसे मिले, जिन्होंने फर्जी ढंग से विश्वविद्यालय के बीटेक के अलग-अलग पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया था। इनमें 2020-21 बैच के 22 और 2021-22 बैच के 18 छात्र शामिल हैं।
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ऐसे पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
कंप्यूटर साइंस विभाग की एक छात्रा की संदिग्ध गतिविधियों का संज्ञान लेते हुए एक प्रोफेसर ने उससे प्रवेश का आवंटन पत्र मांगा। उसने जो पत्र दिया, वह तो फर्जी था ही, प्रवेश के लिए जमा की गई फीस की रसीद भी फर्जी मिली। प्रोफेसर ने जब यह जानकारी विश्वविद्यालय प्रशासन को दी, तो कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने सभी ब्रांच के प्रवेश की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया। जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुल्क और आवंटन पत्र के मिलान में पाया गया कि कई छात्रों का प्रवेश सूची से भिन्न नामों से है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के बाद 40 छात्रों का प्रवेश निरस्त कर दिया था।