गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव हारने वाले वित्त विहीन शिक्षक महासंघ के प्रत्याशी अजय सिंह ने दोबारा मतगणना कराने की मांग की है। इस सिलसिले में शनिवार को उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर जयंत नार्लिकर को लिखित पत्र दिया है। अजय ने मतगणना में अनियमितता के आरोप भी लगाए हैं। वहीं, सहायक निर्वाचन अधिकारी ने अजय सिंह के आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि शिकायत का अब कोई मतलब नहीं है।
शिक्षक एमएलसी का चुनाव हारने वाले अजय सिंह का आरोप है कि 900 मत पत्रों की वैधता पर विवाद था। इस पर बाद में फैसला लेने का भरोसा दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गोपनीय तरीके से सभी मत शर्मा गुट के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी को दे दिए गए। मतगणना में गड़बड़ी की आशंका पहले से थी, क्योंकि चुनाव और बैलेट बॉक्स जमा कराने जैसे महत्वपूर्ण कार्य में ध्रुव कुमार त्रिपाठी के रिश्तेदार व डिप्टी डायरेक्टर बचत विजय नाथ मिश्र को लगाया गया था। मतगणना से ठीक पहले इसकी जानकारी मिली थी। आपत्ति के बाद ही रिटर्निंग ऑफिसर ने विजय नाथ मिश्र को मतगणना से अलग किया था।
अजय सिंह के मुताबिक यदि किसी प्रत्याशी को कुल वैध मतों के 51 फीसदी मत मिल जाएं तो विजेता घोषित किया जाता है। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मामले में ऐसा नहीं हुआ है। इस क्षेत्र के 17 जिलों में 28802 वोट पड़े थे। इसमें से 1217 वोट रद्द कर दिए गए। वैध मतों की संख्या 27525 रह गई। लिहाजा, जिस प्रत्याशी को 13 हजार 763 मत मिलते, उसे ही विजेता घोषित किया जा सकता था। अगर इतने मत नहीं मिल रहे हैं तो सभी प्रत्याशियों के द्वितीय वरीयता के मतों की गणना कराई जानी चाहिए थी। दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रत्याशी को मिले दूसरे वरीयता के मतों की गणना कराई, लेकिन ध्रुव कुमार त्रिपाठी को छोड़ दिया गया।
अजय ने कहा कि अगर ध्रुव कुमार त्रिपाठी के मतों की गणना कराई जाती तो उसका कुछ हिस्सा दूसरे स्थान पर रहने वाले प्रत्याशी को मिल सकता था। इससे नतीजा बदल सकता था। ध्रुव त्रिपाठी को प्रथम व द्वितीय वरीयता के 11 हजार 154 मत मिले थे, फिर भी विजेता घोषित कर दिया गया।
कहा कि मतगणना में अनियमितता के पीछे जो भी हैं, उन सबको बेनकाब किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो हाईकोर्ट जाएंगे। इस सिलसिले में शिक्षक एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी से मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो सकी। ध्रुव का पक्ष जैसे ही आएगा, उसे प्रकाशित किया जाएगा।
अपर आयुक्त/सहायक निर्वाचन अधिकारी गोरखपुर अजय कांत सैनी ने बताया कि अगर किसी तरह की आपत्ति थी तो मतगणना समाप्ति के बाद ही दर्ज करानी चाहिए थी। अब रिकाउंटिंग की मांग का कोई मतलब नहीं है। अजय सिंह ने जो आपत्ति की थी, उसका जवाब दे दिया गया है। डिप्टी डायरेक्टर बचत का मामला सामने आया था। इसके बाद ही डिप्टी डायरेक्टर को मतगणना से अलग करा दिया गया था। मतगणना नियमानुसार हुई है। इसकी लिखित सहमति शिकायतकर्ता ने भी दी है। निर्वाचन आयोग की अनुमति के बाद ही जीत का प्रमाण पत्र दिया गया।