किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. विजय प्रताप सिंह ने बताया कि गर्मी की वजह से शरीर में पानी की कमी हो जा रही है। इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। पानी कम होने की वजह से शरीर में फॉस्फेट, यरेट, यूरिक एसिड और अमीनो एसिड के छोटे-छोटे कण किडनी में जमा होने लगते हैं। इसकी वजह मरीजों के पेशाब में जलन होना शुरू हो जाता है। इसकी वजह से किडनी में भी दिक्कतें आनी शुरू हो रही हैं। ऐसे मामले पिछले एक माह के अंदर बढ़े हैं। करीब हर 10 में से तीन मरीज पेशाब में अधिक जलन की समस्या से पीड़ित आ रहे हैं।
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गर्मी में यह काम जरूर करें
- खूब पानी पीएं। ताजा और सुपाच्य भोजन करें। सादा खाना खाएं। बच्चों को अगर दस्त हो रहा है तो ओआरएस का घाल दें।
- बाहर निकलें तो पूरी बांह का कपड़ा पहनें।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान आचार्य प्रो. विनय सिंह ने कहा कि नॉनवेज में मुर्गा, मछली और मांस तीन प्रमुख व्यंजन हैं। पुरानी कहावत है कि जिस महीने के आखिर में 'र' शब्द आता है उस महीने में ही मांस-मछली खानी चाहिए। इसकी बड़ी वजह यह है कि मछली की तासीर गर्म होती है। मार्च से अगस्त तक मछली के प्रजनन का समय होता है। सितंबर से लेकर दिसंबर तक ही मछली खाने का अच्छा समय होता है।
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इसी प्रकार बकरे का मीट मार्च से मई तक ही खाना चाहिए, क्योंकि मटन की तासीर ठंडी होती है। देसी मुर्गा है तो वह किसी मौसम में खाएं नुकसान नहीं करेगा। लेकिन, इस समय फार्म वाले मुर्गे को इंजेक्शन देकर बढ़ा दिया जा रहा है, यही कारण है कि लीवर और गुर्दे को यह नुकसान पहुंचा रहा है।
वैसे भी, नॉनवेज में मसाला ज्यादा नुकसान कर रहा है। मसाले में अगर हल्दी, जीरा, मरीच, धनिया का इस्तेमाल करें तो यह शरीर के लिए फायदेमंद है। लेकिन, बाजार में जो मसाले आ रहे हैं वे नकली हैं। होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट में मिलावटी मसाले ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके चलते भी कैंसर जैसी घातक बीमारी के लोग शिकार हो रहे हैं।