शहर क्षेत्र में ताल पोखरों का अतिक्रमण होने की वजह से जलभराव की नौबत आई है। जानकारों का कहना है कि मोहल्लों में प्राकृतिक जल संग्रह होने से बरसात का पानी उसमें चला जाता था। अतिक्रमण होने की वजह से सभी पट गए हैं, इसलिए जलभराव की नौबत आ जाती है। बारिश का पानी इकट्ठा होने से भूमि जल संरक्षण होता था। गर्मियों में वायुमंडल ठंडा रखने में मदद करते थे। साथ ही मिट्टी में नमी बनी रहती थी। पशुओं के लिए पीने का पानी उपलब्ध हो जाता था।
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गोरखपुर शहर के प्रमुख तालाबों, पोखरों और गड़ही की अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है। इसमें शामिल भेड़ियागढ़ 3.820 हेक्टयेर में फैला हुआ है। तकिया कवलहदह 0.020 हेक्टेयर, ताल सुमेर सागर 0.781 हेक्टेयर, पुर्दिलपुर 0.179 हेक्टेयर, दिलेजाकपुर 0.898 हेक्टेयर, बशारतपुर 0.894 हेक्टेयर, घोषीपुर 0.054 हेक्टेयर, अलीनगर सुमली 0.333 हेक्टेयर, जंगल शिवपुर उर्फ साहबगंज 0.283 हेक्टेयर और खूनीपुर 1.406 हेक्टेयर भूमि शामिल है। इनके अलावा अन्य भी अतिक्रमण की जद में हैं।
सदर तहसीलदार विकास कुमार सिंह ने कहा कि ताल पोखरों के संबंध में जानकारी ली जाएगी। पूर्व में क्या कार्रवाई हुई है। इसको अपडेट कराया जाएगा। इसकी पूरी जानकारी लेकर ही कुछ कह पाएंगे।