एचआईवी जांच के लिए अब किट के लिए परेशान नहीं होना होगा। किट के रख-रखाव के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोल्ड रूम बनाया गया है। कोल्ड रूम में ढाई से तीन लाख जांच किट रखने की क्षमता है। नोडल अधिकारी डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की निगरानी में 85 इंटीग्रेटेड काउंसिलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर (आइसीटीसी) संचालित हो रहे हैं।
इससे कई जिले जुड़े हैं। इन जिलों में गोरखपुर, बस्ती मंडल के अलावा अंबेडकर नगर, बलिया, मऊ, आजमगढ़ जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलों में मांग के अनुसार सेंटरों पर किट पहुंचाई जा रही है, जबकि पहले एचआईवी टेस्ट किट लखनऊ से मंगानी पड़ती थी। इसके लिए एक लैब टेक्नीशियन लखनऊ जाता था। इस वजह से सेंटर बंद हो जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है।
एचआईवी पॉजिटिव मरीज बरतें ज्यादा एहतियात
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि कोविड का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन साउथ अफ्रीका में एक एचआईवी पीड़ित व्यक्ति में मिला है। ऐसे में इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि एचआईवी मरीजों को कोरोना के नए वैरिएंट से खतरा ज्यादा है।
एचआईवी संक्रमित गर्भवती को भी हुआ था कोरोना
कोरोना की दूसरी लहर में इस साल एचआईवी पीड़ित महिला गर्भवती हुई थी। इस बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच में वह कोरोना पॉजिटिव पाई गई। पूर्वांचल में इस तरह का यह पहला मामला था। हालांकि, कॉलेज के गायनी विभाग ने महिला का प्रसव कराते हुए बच्चे को एचआईवी और कोरोना दोनों से बचा लिया था।
एचआईवी संक्रमित से यौन संबंध, संक्रमित सिरिंज का इस्तेमाल, संक्रमित अंग प्रत्यारोपण, संक्रमित मां से जन्म लेने वाले शिशु को एचआईवी का खतरा हो सकता है। हालांकि संक्रमित मां से बच्चे को संक्रमण का कोई मामला जिले में नहीं आया है।
एचआईवी के लक्षण
गले में सूजन व गिल्टी। लगातार वजन घटते जाना। कोई भी बीमारी होने के बाद ठीक न होना। मुंह में घाव, त्वचा में खुजली, दर्द होना, सेहत का लगातार गिरना आदि लक्षण शामिल हैं।
एचआईवी के बचाव
असुरक्षित यौन संबंध से बचें। दूसरों के द्वारा प्रयोग की गई सिरिंज का इस्तेमाल न करें। अनजान व्यक्ति से रक्त न लें।