कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या के मामले की पहले चरण की जांच सीबीआई ने पूरी कर ली है। अब सभी बयानों का मिलान कराने के बाद जरूरत पड़ी तो दोबारा आरोपी व अन्य लोगों से पूछताछ की जा सकती है। केस दर्ज कराने में देरी का कारण बने अफसरों से भी पूछताछ संभव है।
जानकारी के मुताबिक, मनीष गुप्ता हत्याकांड में कार्रवाई में लापरवाही, केस दर्ज करने में देरी के भी आरोप हैं। माना जा रहा है कि देरी का कारण बने अफसर व कर्मचारियों से पूछताछ की जा सकती है। सीबीआई ने अभी एनेक्सी भवन का अपना कमरा खाली नहीं किया है।
जिस कमरे में पूछताछ चल रही थी उसमें उनके दस्तावेज मौजूद हैं। एक कमरा अभी सीबीआई के नाम से बुक है। सीबीआई 11 नवंबर को पहली बार गोरखपुर आई थी। सभी आरोपी पुलिस कर्मियों व मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी ने आरोप लगाया था कि डीएम व एसएसपी ने घटना के बाद पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज न करवाने का दबाव डाला था। इसका एक वीडियो भी सामने आया था।
हत्यारोपी पुलिसकर्मियों से जेल में की पूछताछ
शुक्रवार को सीबीआई के चार अधिकारी एएसपी संजय शर्मा के नेतृत्व में जेल पहुंचे और वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम में जेएन सिंह व अक्षय मिश्रा को बारी-बारी बुलाया गया। सीबीआई के सामने पहले अक्षय मिश्रा पेश हुए और उसके बाद जेएन सिंह आए। करीब 1:30 बजे तक उनसे सीबीआई ने मनीष की मौत से जुड़े पहलुओं पर कई तरह के सवाल पूछे। टीम ने दोनों आरोपियों से पहले घटना विवरण पूछा और इसके बाद सवाल पूछे।
सीबीआई के सामने पहले दोनों पुलिस वाले खुद को बेकसूर बताते रहे। पूर्व में दिए गए बयान को ही दोहराते रहे। बाद में सीबीआई के अधिकारी एनेक्सी भवन लौटे और वहां से एएसपी संजय शर्मा सहित तीन सदस्य सड़क मार्ग से लखनऊ लौट गए। अब सिर्फ विवेचक विवेक श्रीवास्तव ही गोरखपुर में ठहरे हैं।