कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत मामले में रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जयनारायन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस कर्मियों के निलंबन की जांच कर रहे एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बुधवार की देरशाम रिपोर्ट एसएसपी को सौंप दी। जांच में सामने आया है कि पुलिस वालों ने पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन किया। लापरवाही भी बरती गई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। बर्खास्तगी की सिफारिश एसएसपी कर सकते हैं। खबर है कि रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि आला अफसरों को आरोपी पुलिसकर्मियों ने झूठी सूचना दी थी।
एसपी नार्थ ने जांच में आरोपी पुलिसकर्मियों पर अनुशासनहीनता, लापरवाही बरतने का आरोप सही पाया है। जांच रिपोर्ट में इन बातों का भी उल्लेख है कि आरोपित पुलिसकर्मियों ने कई तथ्यों को छिपाया था। अनुशासनहीनता भी बरती गई थी।
जानकारी के मुताबिक, कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता ने एसएसपी को प्रार्थनापत्र देकर आरोप लगाया था कि 27 सितंबर की रात में रामगढ़ताल थाना पुलिस ने उनके पति मनीष की बेरहमी से पिटाई कर दी थी जिससे उनकी मौत हो गई।
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने इस मामले में तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा, दरोगा विजय यादव, दरोगा राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव और कांस्टेबल प्रशांत कुमार को निलंबित कर दिया था। एसएसपी ने विभागीय जांच एसपी नार्थ मनोज अवस्थी को सौंपी थी।
आठ दिनों की जांच के बाद एसपी नार्थ ने निलंबित किए गए सभी पुलिस कर्मियों की भूमिका को संदिग्ध पाया है। उन्होंने एसएसपी के पास भेजी गई अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि सभी पुलिसकर्मियों ने अनुशासनहीनता बरती है। विभागीय नियमों की अनदेखी की है। इसके अलावा अधिकारियों को भी झूठी सूचना दी है।