एसआईटी ने दोनों आरोपियों से करीब साढ़े छह घंटे पूछताछ की। इस दौरान आरोपी खुद को बेगुनाह बताते रहे। देररात थाने में ही आरोपियों का मेडिकल कराया, फिर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। न्यायिक अभिरक्षा में दोनों जेल भेजे गए, कारागार के नेहरू बैरक में रखा गया।
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या में नामजद रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा को रविवार देरशाम गोरखपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की फिराक में थे। वारदात से 13 दिन बाद गिरफ्तार किए गए दोनों मुख्य आरोपियों से थाने में देर रात तक करीब साढ़े छह घंटे पूछताछ की गई। इस दौरान आरोपी खुद को बेगुनाह ही बताते रहे। हालांकि कई सवालों का जवाब नहीं दे पाए और चुप्पी साधे रहे।
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देर रात जिला अस्पताल से डॉक्टरों की टीम थाने में बुलाई गई और हत्यारोपियों का मेडिकल कराया गया। रात साढ़े ग्यारह बजे के बाद सिविल जज जूनियर डिवीजन/फास्ट ट्रैक कोर्ट अमित कुमार की अदालत में आरोपियों को पेश किया गया, जहां से रात 12:50 बजे आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। दोनों को अन्य कैदी व बंदियों से अलग मंडलीय कारागार के नेहरू बैरक में रखा गया है। मंडलीय कारागार के बाहर भी सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए थे।
वहीं, कारोबारी की हत्या में नामजद दरोगा विजय यादव, राहुल दुबे, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ, कानपुर एसआईटी व गोरखपुर पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। सभी आरोपी एक-एक लाख रुपये के इनामी हैं।
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बेरहमी से पिटाई के कारण हुई थी मनीष की मौत
जानकारी के मुताबिक, कारोबारी मनीष गुप्ता की हत्या में नामजद निलंबित इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह और फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा कोर्ट में सरेंडर (आत्मसमर्पण) करने के लिए गोरखपुर आए थे। इसकी भनक गोरखपुर पुलिस को लग गई थी। लिहाजा, एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने घेराबंदी कराई और अलग-अलग थानों के पुलिस कर्मियों को लगा दिया। इसी बीच बांसगांव थाने के इंस्पेक्टर राणा देवेंद्र प्रताप सिंह को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी इंस्पेक्टर व दरोगा देवरिया बाईपास स्थित अमर उजाला तिराहे के पास खड़े हैं। दोनों वाहन पकड़कर कचहरी जाने की फिराक में थे।
सूचना मिलने के साथ ही राणा देवेंद्र प्रताप सिंह अपने सहयोगी एसएसआई नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव, कांस्टेबल मोहित कुमार और राहुल यादव के साथ अमर उजाला तिराहे पहुंचे और दोनों मुख्य आरोपितों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों को सीधे रामगढ़ताल थाने ले जाया गया। साथ ही गिरफ्तारी की सूचना कानपुर एसआईटी के प्रभारी व एसीपी आनंद प्रकाश तिवारी को दी गई।
इसके बाद एसआईटी प्रभारी थाने पहुंचे। थाने में ही गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की गई। मुख्य आरोपी जगत नारायण सिंह मूलरूप से अमेठी जिले के मुसाफिर खाना थाना क्षेत्र के नारा गांव का रहने वाला है। जबकि अक्षय मिश्रा बलिया जिले के नरही थानाक्षेत्र के मंझरिया गांव का रहने वाला है। बताया गया कि देररात आरोपितों को भेजने के पीछे अधिवक्ताओं का गुस्सा है।
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की 27 सितंबर को शहर के होटल कृष्णा पैलेस में पुलिस की पिटाई से मौत हो गई थी। वह अपने दो दोस्तों हरवीर सिंह और प्रदीप चौहान के साथ गुरुग्राम से गोरखपुर घूमने आए थे। रात 12 बजे के बाद रामगढ़ताल पुलिस छानबीन के लिए पहुंची थी।
आरोप है कि होटल के कमरे में पुलिस ने मनीष गुप्ता की बेरहमी से पिटाई की थी। मामले में रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह और फलमंडी चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था। जेएन सिंह सहित सभी पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था।
घटना के बाद गोरखपुर पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आई थी। लिहाजा, शासन ने हत्याकांड की जांच कानपुर स्थानांतरित कर दी। कानपुर से ही जांच के लिए स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित कर दी गई। एसीपी आनंद प्रकाश तिवारी की अगुवाई वाली एसआईटी गोरखपुर में डेरा डाले है। एसआईटी एक-एक बिंदु की जांच कर रही है।
हत्यारोपी इंस्पेक्टर व दरोगा की गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही एसआईटी रामगढ़ताल थाने पहुंच गई। एसीपी आनंद प्रकाश तिवारी ने दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की है। होटल की घटना और कारोबारी मनीष को जिला अस्पताल की जगह मानसी अस्पताल ले जाने का कारण पूछा है। यह भी पूछा कि मनीष को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने में देरी क्यों की गई? भर्ती कराने के लिए दो पर्चा क्यों बनवाया गया? रामगढ़ताल पुलिस की जीडी में यह क्यों लिखा गया कि होटल में घायल कारोबारी मनीष को जिला अस्पताल ले जाया गया था? सूत्रों के मुताबिक जगत नारायन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा एसआईटी के कई सवालों का जवाब नहीं दे सके हैं।
लगातार बदल रहे थे स्थान
मनीष हत्याकांड के 13वें दिन आरोपी इंस्पेक्टर व दरोगा की गिरफ्तारी हो सकी है। बताया जा रहा है कि आरोपी पुलिस कर्मी लगातार स्थान बदल रहे थे। इस वजह से यूपी एसटीएफ, कानपुर एसआईटी, गोरखपुर पुलिस व क्राइम ब्रांच की अलग-अलग टीमों को जल्दी सफलता नहीं मिल सकी। टीमें लगातार अमेठी, बलिया, बाराबंकी, गाजीपुर, गोरखपुर सहित कई जिलों में दबिश दे रही थीं। आरोपितों के कोर्ट में हाजिर होने की चर्चा भी थी। लिहाजा, पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी थी।
जिस थाने में इंस्पेक्टर वहीं आरोपी व गिरफ्तारी
हत्या आरोपी जगत नारायण सिंह जिस थाने में इंस्पेक्टर था, उसी क्षेत्र से गिरफ्तारी हुई है। रामगढ़ताल थाने में ही हत्यारोपियों से एसआईटी ने पूछताछ की, फिर बंदियों के वाहन में बैठाकर देररात मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
घोषित हुआ था एक-एक लाख रुपये का इनाम
कारोबारी हत्याकांड में नामजद जगत नारायण सिंह और अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस कर्मियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका है। अभी दो हत्या आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। दरोगा राहुल दुबे, विजय यादव, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव व कांस्टेबल प्रशांत कुमार अभी तक पुलिस की पकड़ से दूर हैं। अगर जल्द ही गिरफ्तारी नहीं हुई तो इन आरोपितों पर इनाम की राशि बढ़ाई जा सकती है। इस मामले में शासन के साथ ही मामले की जांच कर रही एसआईटी का रुख सख्त है।
एसएसपी गोरखपुर डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में नामजद इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा को देवरिया बाईपास तिराहा के पास से गिरफ्तार किया गया है। मामले की सूचना कानपुर से आई एसआईटी को दे दी गई है। एसआईटी ने आरोपियों से पूछताछ भी की है। देररात मेडिकल कराने के बाद आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया है।