महंत हरिशचंद्र दास का आरोप है कि रामप्रसाद ने जबरन महंत हौशिलादास को बंधक बना लिया। 20 अगस्त को ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें चारपाई पर सोए हौशिलादास खुद को घासीकटरा पहुंचाने की बात कहते सुने जा रहे हैं। हरीश चंद्र दास का आरोप है कि संत समाज को बिना बताए ही उनको समाधि दी गई है।
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लेकिन आरोपों में घिरे महंत इसे सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि महंत हौशिलादास खुद यहां आए थे। वह उनकी सेवा कर रहे थे और समाज की मौजूदगी में ही उन्हें समाधि दी गई है। खैर मौत की वजह चाहे जो हो, लेकिन पूरे विवाद के पीछे वाराणसी, गोरखपुर और संतकबीरनगर की जमीन ही है।
महंत हरीश चंद्र पिछले एक साल से विवाद को सोशल मीडिया पर अपडेट कर रहे थे। संतकबीरनगर के महुली थाने में प्रार्थना पत्र देने से लेकर खजुरी में जमीन को लेकर चल रहे विवाद तक को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। लोगों से अपील की कि वे सच्चाई जानें।