फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानिए कब मनाई जाती है गीता जयंती, श्रीमद्भगवद् से है इसका कनेक्शन

Tue, 22 Dec 2020 04:25 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
विज्ञापन
श्रीमद्भगवद्गीता। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष गीता जयंती 25 दिसंबर शुक्रवार को मनाई जाएगी। ब्रह्मपुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को दिया था। इसलिए इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है।

विज्ञापन


भगवद्गीता का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार श्रीमद्भगवद् गीता का मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। गीता के उपदेश मनुष्य को जीवन की वास्तविकताओं से अवगत करवाता है। उन्हें निस्वार्थ रूप से कर्म करने के लिए प्रेरित करता है। इन्हें कर्तव्यपरायण बनाता है। सबसे अहम बात यह भी है कि जब भी आप किसी भी तरह की शंका में घिरे हों, गीता का अध्ययन करें आपका उचित मार्गदर्शन अवश्य होगा।

इसके अध्ययन, श्रवण, मनन-चिंतन से जीवन में श्रेष्ठता का भाव आता है। गीता का संदेश वो मूल मंत्र हैं जिन्हें हर कोई अपने जीवन में आत्मसात कर पूरी मानवता का कल्याण कर सकता है। गीता अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर आत्मज्ञान से भीतर को रोशन करती है। गीता अज्ञान, दुख, मोह, क्रोध, काम, लोभ आदि से मुक्ति का मार्ग बताती है।
विज्ञापन


 

विज्ञापन

गीता के सात सौ श्लोक में छिपा है पूरे जीवन का सार

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार श्रीमद्भगवत गीता में 18 अध्याय और सात सौ श्लोक हैं। इसमें 574 श्लोक योगेश्वर श्रीकृष्ण ने कहे हैं, 84 अर्जुन ने कहे हैं, 41 संजय ने और एक धृतराष्ट्र ने कहा है। गीता सनातन धर्म का प्रमुख धार्मिक ग्रंथ माना गया है। इसे महाभारत के अमृत के रूप में भी जानते हैं। योगेश्वर श्रीकृष्ण कहते हैं कि इसका पाठ करने वाला कितना भी पापी क्यों न हो लेकिन उसे ईश्वर की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गीता प्रेस में आयोजित होते हैं कार्यक्रम
विश्वभर में गीता पहुंचाने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह है गोरखपुर में स्थापित गीता प्रेस। गीता प्रेस से हर साल गीता की लाखों प्रतियां प्रकाशित होती है जो पूरी दुनिया में भेजी जाती है। गीता जयंती पर गीता प्रेम में कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता होती है। गीता का पाठ, गीता की पूजा के साथ ही गीता पर ही आधारित संगोष्ठी का आयोजन होता है। लेकिन इस बार कोरोना को देखते हुए भी सार्वजनिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें