कोरोना वायरस से लोगों की रक्षा करने के लिए आयुष मंत्रालय अब आयुष संजीवनी एप लेकर आया है। इस एप में आयुष मंत्रालय के सभी निर्देश हैं, वहीं इसमें लोगों के सवाल-जवाब का भी प्रावधान दिया गया है।
इन्हीं सवाल-जवाब के आंकड़ों के आधार पर यह तय होगा कि आयुष मंत्रालय की सलाह लोगों के लिए कितनी फायदेमंद साबित हो रही है। लोग इस एप पर अपने अनुभव साझा कर सकेंगे कि वह आयुष मंत्रालय की सलाह को कब से अपना रहे हैं और कितने दिनों में इसका फायदा हुआ।
कोरोना रैपिड रिस्पांस टीम के प्रभारी डॉ एके सिन्हा ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि आयुष संजीवनी एप का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार हो ताकि और लोग इसका फायदा उठाकर निरोग रह सकें।
उन्होंने कहा कि भारत में पारंपरिक चिकित्सा का लंबा इतिहास रहा है। आयुर्वेद के क्षेत्र में अग्रणी होने के नाते आयुष मंत्रालय आयुष प्रणालियों के माध्यम से देश में कोरोना वायरस की समस्या का समाधान करने के लिए काम कर रहा है।
इन्हीं आयुर्वेद से जुड़ीं पद्धतियों पर क्लिनिकल रिसर्च स्टडीज और आयुष संजीवनी एप की शुरुआत की गई है। यह एप कोविड की रोकथाम के लिए आयुष चिकित्सा प्रणालियों के उपयोग की स्वीकृति और लोगों के बीच इसके प्रभावों से आंकड़े जुटाने में उपयोगी साबित होगा।
उन्होंने बताया कि इस एप के जरिए देश भर के 50 लाख लोगों के अनुभवों के बारे में आंकड़े जुटाने का लक्ष्य तय किया गया है।इस एप को अपने मोबाइल में इंस्टाल कर कोरोना से बचाव से संबंधी सभी जानकारियां ले सकते हैं।