पंडित बृजेश पांडेय शास्त्री के अनुसार, वधू प्रवेश, वरवरण, कन्यावरण, बरच्छा, विवाह से संबंधित समस्त कार्य, मुंडन, गृहप्रवेश, गृहारंभ, प्रथम बार तीर्थ पर गमन आदि कार्य खरमास में नहीं किए जाते हैं।
29 अप्रैल तक अस्त रहेंगे बृहस्पति
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, खरमास में शुभ कार्य नहीं होंगे, लेकिन इस बार शुभ मुहूर्त के लिए दो मई तक का इंतजार करना होगा। क्योंकि वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 31 मार्च को बृहस्पति अस्त हो रहे हैं और इनका अस्तकाल 29 अप्रैल तक रहेगा। बृहस्पति का बालत्व दोष तीन दिन तक रहता है। इसलिए समस्त मांगलिक कार्य दो मई से ही प्रारंभ होंगे।
ये हैं विवाह मुहूर्त
- मई: 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 15, 16, 17, 20, 21, 22, 26, 27, 28, 29, 30, 31
- जून: 1, 3, 4, 5, 7, 11, 12, 13, 16, 17, 22, 23, 25, 26, 27, 28
- नवंबर: 23, 24, 27, 28, 29
- दिसंबर: 1, 4, 5, 7, 9, 10, 11, 13, 14, 15, 16