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अपराजिता: कृतिकाज किचन से घर-घर पहुंच रही भोजन की थाली, शौक को बनाया कारोबार

Thu, 16 Mar 2023 12:25 PM IST
vivek shukla प्रीति कश्यप, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर विश्वविद्यालय से फूड एंड टेक्नोलॉजी से एमएससी कर रहीं कृतिका सिंह क्लाउड किचन चलाती हैं यानी घर पर खाना तैयार करके सोशल मीडिया और दोस्तों की मदद से लोगों तक पहुंचाती हैं। सोशल मीडिया पर कृतिकाज किचन नाम से कृतिका की प्रोफाइल है।
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कृतिका सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर शहर की कृतिका सिंह ने कुकिंग के शौक को कारोबार में बदल दिया है। अपने कृतिकाज किचन से वह लोगों के घर तक स्वादिष्ट भोजन पहुंचा रही हैं। आय अर्जन के साथ ही वह पढ़ाई भी कर रही हैं। कृतिका कहती हैं कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना बेहद जरूरी है, ताकि अपनी जरूरतों के लिए वह किसी और पर निर्भर न रहें।

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गोरखपुर विश्वविद्यालय से फूड एंड टेक्नोलॉजी से एमएससी कर रहीं कृतिका सिंह क्लाउड किचन चलाती हैं यानी घर पर खाना तैयार करके सोशल मीडिया और दोस्तों की मदद से लोगों तक पहुंचाती हैं। सोशल मीडिया पर कृतिकाज किचन नाम से कृतिका की प्रोफाइल है। इस पर वह ऑनलाइन खाने का आर्डर लेती हैं। दोस्तों के जरिए भी आर्डर लेती हैं। विश्वविद्यालय की कैंटीन के माध्यम से भी उनके भोजन की बिक्री होती है।

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कृतिका ने बताया कि कुकिंग का शौक होने के चलते उन्हें भोजन बनाने का स्टार्टअप शुरू करने का सूझा। बजट ज्यादा न होने के चलते घर से ही कार्य करने का निर्णय लिया। शुरुआत में उन्हें विश्वविद्यालय के होम साइंस विभाग से सबसे पहला काम मिला। विभागाध्यक्ष दिव्या रानी सिंह ने काफी प्रोत्साहित किया।
 

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इडली, डोसा, सांभर और पोहा बेहद पसंद

कृतिका के किचन मेन्यू में इडली, डोसा, सांभर और पोहा बेहद पसंद किया जाता है। बेकिंग में शौक होने के चलते कप केक, मफिन्स और कपकेक भी तैयार करती हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए गुड़ और काले गेहूं के आटे से केक तैयार करती हैं। अपने खाने में वह स्वास्थ्य व स्वच्छता का पूरा ध्यान रखती हैं। कूकिंग-बेकिंग के अलावा उनकी रुचि ज्वेलरी मेकिंग में भी है।

पिता ने कहा-लोग बोलते रहेंगे, तुम काम करो
कृतिका सिंह के माता-पिता न केवल उनका उत्साहवर्धन करते हैं, बल्कि किचन चलाने में सहयोग भी करते हैं। अपने स्टार्टअप के बारे में जब कृतिका ने पिता नवीन चंद्र सिंह को बताया तो उन्होंने हौसला आफजाई की और अपनी सहमति व स्वीकृति दी। कहा कि लोग बोलते रहेंगे, तुम काम करो।



वैज्ञानिक बनना चाहती हैं कृतिका
कृतिका ने बताया कि किचन चलाकर और ट्यूशन पढ़ाकर वह पढ़ाई का खर्च उठाती हैं। उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई सेंट जोसेफ स्कूल से की है। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी होम साइंस की पढ़ाई कर रही हैं। कृतिका फूड एंड टेक्नोलॉजी में क्राइस्ट विश्वविद्यालय बंगलुरू से पीएचडी करके वैज्ञानिक बनना चाहती हैं। इसके अलावा कृतिकाज किचन को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं।

 
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