कृतिका के किचन मेन्यू में इडली, डोसा, सांभर और पोहा बेहद पसंद किया जाता है। बेकिंग में शौक होने के चलते कप केक, मफिन्स और कपकेक भी तैयार करती हैं। डायबिटीज के मरीजों के लिए गुड़ और काले गेहूं के आटे से केक तैयार करती हैं। अपने खाने में वह स्वास्थ्य व स्वच्छता का पूरा ध्यान रखती हैं। कूकिंग-बेकिंग के अलावा उनकी रुचि ज्वेलरी मेकिंग में भी है।
पिता ने कहा-लोग बोलते रहेंगे, तुम काम करो
कृतिका सिंह के माता-पिता न केवल उनका उत्साहवर्धन करते हैं, बल्कि किचन चलाने में सहयोग भी करते हैं। अपने स्टार्टअप के बारे में जब कृतिका ने पिता नवीन चंद्र सिंह को बताया तो उन्होंने हौसला आफजाई की और अपनी सहमति व स्वीकृति दी। कहा कि लोग बोलते रहेंगे, तुम काम करो।
वैज्ञानिक बनना चाहती हैं कृतिका
कृतिका ने बताया कि किचन चलाकर और ट्यूशन पढ़ाकर वह पढ़ाई का खर्च उठाती हैं। उन्होंने बारहवीं तक की पढ़ाई सेंट जोसेफ स्कूल से की है। गोरखपुर विश्वविद्यालय से बीएससी होम साइंस की पढ़ाई कर रही हैं। कृतिका फूड एंड टेक्नोलॉजी में क्राइस्ट विश्वविद्यालय बंगलुरू से पीएचडी करके वैज्ञानिक बनना चाहती हैं। इसके अलावा कृतिकाज किचन को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं।