इसके बाद एसई ने दो अभियंताओं व एक लेखाकार की टीम गठित कर जांच सौपी। तीन सदस्यी टीम ने जांच शुरू करते हुए परीक्षण खंड के एक्सईएन को पत्र लिखकर कुछ दस्तावेज व सूचनाए मांगी। लेकिन, एक्सईएन एके श्रीवास्तव ने उपलब्ध कराने में कोई रुचि नहीं ली। इसके बाद जांच टीम ने मामले से सीई व एसई को अवगत कराया। सीई ने परीक्षण खंड के एक्सईएन को पत्र लिखकर दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद टीम के सदस्य लगातार परीक्षण खंड कार्यालय का चक्क्रर काटते रहे। वे अपनी गुगल लोकेशन भी सीई को वाट्सएप करते रहे। बावजूद इसके एक्सईएन व एई मीटर ने किसी तरह का दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट बनाकर चार दिन पहले एसई को सौप दी।
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अधीक्षण अभियंता ग्रामीण प्रथम विनोद कुमार ने बताया कि चेयरमैन के निर्देश पर गठित टीम ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें अभियंताओं को दोषी ठहराते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए हैं। मामले में उच्चधिकारियों को भी अवगत करवा दिया गया है। निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
टीम के तीनों सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 11 कनेक्शनों पर नो डिस्प्ले में उतारे गए मीटरों के बदले जाने का समुचित आदेश व इंडेंट जांच टीम को नहीं मिला। इस संबंध में कई बार संबंधित अभियंताओं से पत्राचार भी किया। टीम ने व्यक्तिगत जाकर भी पत्रावलियां तलब की थी। वर्तमान एई मीटर ने वायदा के बाद भी दस्तावेज नहीं उपलब्ध कराए।
इस प्रकार की कार्यशैली से पूर्णतय स्पष्ट है कि रीडिंग स्टोर वाले मीटरों को मनमानी तरीके से जेएमटी अरुण कुमार गुप्ता ने बदला। इस पर अंकुश लगाने के लिए सहाय अभियंता मीटर व एक्सईएन मीटर द्वारा किसी भी प्रकार का सार्थक प्रयास नहीं किया गया। ऐसे में निगम को हुई वित्तीय क्षति से इंकार नहीं किया जा सकता है।