बीते दिनों हुई स्वामी सहजानंद पूर्वांचल कल्याण मंच की बैठक।
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भूमिहार समाज को एक दूसरे से जोड़ने की पहल एक बार फिर शुरू हुई है। इसके लिए स्वामी सहजानंद पूर्वांचल कल्याण मंच बनाया गया है। संगठन को विस्तार देने के लिए गोरखपुर शहर को छह मंडलों में बांटा गया है। एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर समाज के लोगों को जोड़ा जा रहा है। हालांकि संगठन में पदाधिकारियों का चुनाव अभी नहीं किया गया है। जल्द ही चुनाव संभव है।
जानकारी के मुताबिक संगठन को शुरू करने में मुख्य भूमिका नगर निगम के पूर्व उप सभापति एवं सिविल लाइंस एक के पार्षद अजय राय, योगाचार्य प्रमोद राय, समाजसेवी डॉ प्रमोद कुमार राय एवं डॉ महेंद्र राय ने निभाई है। इसके साथ ही समाज के कुछ प्रमुख लोगों को भी जोड़ा गया है। जो सक्रियता से समाज के लोगों के बीच जा रहे हैं।
पूर्व उप सभापति अजय राय इसके पहले युवा भूमिहार समाज के अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि संगठन में समाज से करीब एक हजार लोग जुट चुके हैं। सभी को व्हाट्सएप से संदेश भेजा जा रहा है। अब योजना होली मिलन समारोह कराने की है। ताकि समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को एक जगह बुलाकर रूबरू कराया जा सके। इसके बाद सम्मान समारोह भी होगा, जिसमें मेधावी बच्चों के साथ समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।
हर महीने होती है नियमित बैठक
स्वामी सहजानंद पूर्वांचल कल्याण मंच की बैठक हर महीने के पहले रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर आर्यनगर में हो रही है। इसमें शहर के छह मंडलों के लोग शामिल होते हैं। इसमें समाज के लोगों को जोड़ने पर चर्चा होती है और आगे की रणनीति बनाई जाती है।
शहर में बने हैं ये मंडल
रुस्तमपुर, तारामंडल, इंजीनियरिंग कॉलेज, गोरखनाथ, बशारतपुर, बक्शीपुर
निष्क्रिय हैं पहले के दो संगठन
शहर में भूमिहार समाज के दो संगठन अखिल भारतीय भूमिहार समाज और युवा भूमिहार समाज पहले से हैं। करीब पांच वर्ष पूर्व तक दोनों ही संगठनों में बड़ी सक्रियता थी। बड़े-बड़े सम्मेलन भी कराए गए। लेकिन अब दोनों संगठन निष्क्रिय पड़े हैं। अखिल भारतीय भूमिहार समाज से जुड़े ज्यादातर लोग उम्रदराज हैं और युवा भूमिहार समाज में नौजवानों की संख्या ज्यादा है। तालमेल बिगड़ने की एक वजह यह भी है। दोनों ही संगठन की ओर से बीच में दो सम्मेलन हुए थे, जिसमें समाज के लोगों के बीच ही दूरियां बढ़ गईं। अब कोई गतिविधि नहीं होती है। युवा भूमिहार समाज के अध्यक्ष अजय राय कहते हैं, व्यस्तता के चलते गतिविधियां ठप हो गई थीं। लेकिन, अब नए सिरे से स्वामी सहजानंद पूर्वांचल कल्याण मंच बनाकर समाज के लोगों को जोड़ा जा रहा है। वहीं अखिल भारतीय भूमिहार समाज के महामंत्री का कहना है कि यह सही है लोगों की व्यस्तता के चलते गतिविधियां नहीं हो पाई। लेकिन, बैठकें अब हो रही है। संगठन को सक्रिय किया जा रहा है।
किसान आंदोलन के प्रणेता हैं स्वामी सहजानंद
स्वामी सहजानंद सरस्वती राष्ट्रवादी वामपंथ के अग्रणी सिद्धांतकार, वेदांत और मीमांसा के महान पंडित तथा संगठित किसान आंदोलन के जनक एवं संचालक थे। स्वामीजी का जन्म उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले के देवा गांव में सन 22 फरवरी 1889 में महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। 1907 में काशी जाकर स्वामी अच्युतानंद से विधिपूर्वक दशनामी दीक्षा लेकर नौरंग राय से स्वामी सहजानंद सरस्वती हो गए। काशी के कुछ पंडितों ने इनके संन्यास ग्रहण करने पर विरोध भी किया। स्वामी सहजानंद ने इसे चुनौती के रुप में स्वीकार किया और उन्होंने विभिन्न मंचों पर शास्त्रार्थ करके ये साबित कर दिया कि भूमिहार भी ब्राह्मण हीं हैं और हर योग्य व्यक्ति संन्यास धारण करने की पात्रता रखता है।