वेल्ड इंडिया के निदेशक आरएन सिंह ने कहा कि निर्माण संबंधी उद्योगों की स्थिति काफी खराब है। बाजार में मांग नहीं है। फिलहाल बहुत ही कम उत्पादन किया जा रहा है। गोदाम में पड़े स्टॉक से ही काम चलाया जा रहा है। सरकार को कुछ राहत भरे कदम उठाने चाहिए। साथ ही सरकारी निर्माण कार्य में तेजी लानी चाहिए। ऐसे करने पर ही निर्माण से जुड़े उद्योगों की स्थिति कुछ बेहतर हो सकेगी।
समारोहों के सीमित होने से पैकेजिंग इंडस्ट्री बेहाल
श्री सिद्धेश्वरी उद्योग एमडी हिमांशु टिबड़ेवाल ने कहा कि प्लास्टिक एवं पैकेजिंग इंडस्ट्रीज की स्थिति काफी खराब है। फैक्ट्री संचालन में भी मुश्किल आ रही है। पैकेजिंग मैटेरियल और पेपर डिस्पोजिबल आइटम तैयार होते हैं। सामान्य तौर पर इनकी मांग किसी विवाह या अन्य समारोह में होती है। इन दिनों कोरोना प्रोटोकॉल की वजह से समारोह आयोजित नहीं हो रहे हैं, इस वजह से मांग घटकर 25 प्रतिशत रह गई है।
मकान नहीं बन रहे, उत्पादन पड़ा धीमा
एसके केमिकल्स एमडी एसके अग्रवाल ने कहा कि आदमी की मूलभूत जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान है। कोरोना संक्रमण के दौर में रोटी यानी खान-पान से संबंधित उद्योगों की स्थिति कुछ हद तक ठीक रही, लेकिन मकान और कपड़ा संबंधी उद्योगों की स्थिति काफी खराब है। मकान बन नहीं रहे हैं। ऐसे में इससे संबंधित उद्योगों में उत्पादन करीब-करीब बंद है। कपड़ा उद्योगों की स्थिति भी ऐसी ही है।