भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का संबंध है। रविवार को नेपाल एवं भारत से तमाम बहने भाईयों की कलाई पर नेह की डोर बांधने के लिए सरहद पर पहुंची। सीमा सील होने के कारण दोनो देशो के अधिकारियों ने रोक दिया। लेकिन विशेष अनुरोध पर दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी सहमती पर परिचय पत्र दिखाने के बाद जाने की अनुमति दी। कुछ बहनों के पास परिचय पत्र नहीं था, तो उनके परिजन पहचान पत्र लेकर आए तो उनको जाने दिया गया।
रक्षाबंधन के अवसर पर सोनौली सीमा के दोनों तरफ बहनें हाथों में राखी, मिठाई, रोली, अक्षत और पूजा की थाल लिए भाइयों को राखी बांधने के लिए एकत्र होने लगी। बहनों की सीमा पार दूसरे देश में मौजूद अपने भाइयों को राखी बांधने की जिद के आगे स्थानीय अधिकारियों को झुकना पड़ा।
रविवार को एक दिन के लिए बहनों के लिए सीमा को खोलना पड़ा। नेपाल के अधिकारी भारतीय बहनों को मास्क और सैनिटाइजर देकर उन्हें रवाना किया। इधर भारतीय सीमा में बिना आईडी के नेपाल की तरफ से पहुंची करीब दस की संख्या में भारतीय बहनों के परिजनों के आने पर एसएसबी ने प्रवेश की अनुमति दी।
भारत से नेपाल गई बहनों ने रुपनदेही जिले के भैरहवा, बुटवल, काठमांडू, धकधई, परासी, कपिलवस्तु में भाइयों को राखी बांधकर अपना त्योहार मनाया तो भारतीय बहने सोनौली, नौतनवां जाकर राखी बांधा।
क्षेत्राधिकारी नौतनवां कोमल प्रसाद मिश्र ने बताया कि कुछ भाई-बहन गोरखपुर, लखनऊ, राजस्थान, गुजरात के साथ सीमावर्ती जनपद महराजगंज के कोल्हुई, नौतनवां, सोनौली सीमा पर पहुंचे थे। जिन्हें नेपाली प्रशासन ने रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए एक दिन के लिए नेपाल आने जाने की इजाजत दी है।
रुपनदेही जिले के डीएम आसमान तमांग ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व को लेकर रविवार की सुबह सरहद पर पहुंची बहनों को परेशानी नहीं हो इसके लिए एक दिन के लिए छूट दिया गया है।