गोरखपुर से दिल्ली के लिए ट्रेन चलाने पर कभी रेलवे अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया। 1988 में दिल्ली के लिए शहीद एक्सप्रेस ही एक ट्रेन थी, जिसमें एसी, स्लीपर व जनरल सभी श्रेणी के कोच लगते थे। इस ट्रेन को अब जयनगर से चलाया जा रहा है। 35 साल बाद आज भी एक ही ट्रेन है गोरखधाम एक्सप्रेस जिसमें सभी श्रेणी के कोच लगाए जा रहे हैं। जबकि, गोरखपुर से रोजाना इस समय 90 से 95 हजार यात्री सफर करते हैं। इसमें दिल्ली जाने वालों की संख्या चार से पांच हजार है। जबकि, 1988 में गोरखुपर से सफर करने वाले कुल यात्रियों की संख्या 25 से 30 हजार थी।
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यात्री बोले
पादरी बाजार संजय चौधरी ने कहा कि गोरखधाम एक्सप्रेस में पहले जनरल के छह कोच लगते थे, घटाकर तीन कर दिए गए। बिहार से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में हमेशा भीड़ रहती है। दो महीने पहले अगर रिजर्वेशन न कराएं तो कंफर्म टिकट ही नहीं मिलेगा। मुझे दिल्ली जाना है, समझ में नहीं आ रहा है कि जाऊं कैसे। वेटिंग टिकट बहुत अधिक है, कंफर्म हो ही नहीं पाएगा। दो बार टिकट रद करा चुका हूं।
दक्षिणी बेतियाहाता निवासी सुशील पांडेय ने कहा कि यह बात मुझे समझ में नहीं आ रही है कि जब स्पेशल ट्रेन चल सकती है तो उसी समय पर नियमित ट्रेन क्यों नहीं चला देते हैं? जनरल और स्लीपर कोच में मारामारी है तो बढ़ाने की जगह कोच कम किए जा रहे हैं। इसकी जगह एसी कोच बढ़ रहे हैं। रेलवे प्रशासन का यह नियम मुझे तो अव्यवहारिक लगा। यात्रियों की समस्याओं पर रेल प्रशासन को गंभीर होने की जरूरत है।
पूर्वोत्तर रेलवे के पूर्व मुख्य परिचालन प्रबंधक राकेश त्रिपाठी आबादी के हिसाब से गोरखपुर से दिल्ली के लिए सिर्फ एक नियमित ट्रेन चलाने से काम नहीं चलेगा। एक और ट्रेन की जरूरत है। लेकिन, अभी लखनऊ से कानपुर होकर दिल्ली रूट पर ट्रेनों की संख्या ज्यादा है। ट्रैक और सिग्नल का काम चल रहा है। लेकिन, इसके पूरा होने में समय लगेगा। पहले से कुछ स्पेशल व क्लोन स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। अगर इन ट्रेनों में जनरल कोच की संख्या बढ़ा दी जाए तो यात्रियों को राहत दी जा सकती है। अन्यथा ट्रेनों में मारामारी बनी रहेगी।
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पूर्वोत्तर रेलवे मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आने वाले दिनों में मांग के अनुरूप और ट्रेनें चलाई जा सकें, इसके लिए क्षमता विस्तार का कार्य तेजी से किया जा रहा है। जैसे शेष बचे दोहरीकरण के प्रोजेक्ट, तीसरी लाइन का कार्य तथा सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग का कार्य है, जिसके होने से क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी तथा ट्रेनों की गति बढ़ाई जा सकेगी।