बंदूक की गोलियां तक हो गई हैं खराब
वन प्रभाग में रायफल और डबल बैरल बंदूकें हैं। इनमें से लगभग 20 कारतूस को रायफल के हैं, जबकि 40 बंदूक के हैं। सूत्र बताते हैं कि बंदूक वाले बहुत से कारतूस खराब हो चुके हैं। वर्षों पहले इन्हें मालखाने से रेंज और बीट में भेजा गया था।
2018 में तस्कर हो गए थे हावी
15 जुलाई 2018 को खोराबार के रामलखना जंगल में अवैध कटाई कर रहे तस्करों की सूचना पर वन विभाग ने छापा मारा था। कटान रोकने गए डिप्टी रेंजर डीएन पांडेय को तस्करों ने गोली मार दी थी। गंभीर रूप से घायल रेंजर को वन विभाग के अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया। सूत्रों की मानें तो उस वक्त भी विभागीय असलहा नहीं चलने की वजह से तस्कर हावी हो गए थे।
डीएफओ विकास यादव ने कहा कि वन विभाग के पास मौजूद सभी असलहे पुराने हो चुके हैं। वर्तमान में कुल 15 असलहे हैं जो देखने में सही नजर आते हैं। कारतूस भी कुल 60 ही हैं। अब इनमें से कितने सही हैं, इसकी जानकारी अभी नहीं है। जंगल में तस्करों का सामना करना और उन्हें रोकना, ये बड़ी जिम्मेदारी होती है। सीमित संसाधनों के बीच लगातार टीम जंगलों का निरीक्षण करती है। सुरक्षा के लिए अपने पास पर्याप्त संसाधनों के सहारे तस्करी रोकने का प्रयास भी करती है।