गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की नई महायोजना के प्रारूप पर गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में चल रही सुनवाई के दौरान बुधवार को पूरा सभागार फुल हो गया। सुबह 11 बजे से शुरू होकर दोपहर दो बजे के बाद तक चली सुनवाई में कुल 528 आपत्तिकर्ता आए, जिनमें 350 से अधिक आपत्तिकर्ता खुले क्षेत्र के विरोध में अपनी दलीलें पेश करने पहुंचे थे। ये सभी महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो के रहने वाले हैं। इनके अलावा कड़जहां, बशारतपुर, जंगल बहादुर अली क्षेत्र के आपत्तिकर्ताओं ने भी अपना पक्ष रखा।
जीडीए की नई महायोजना के प्रारूप में एम्स से सटे महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो को खुला क्षेत्र घोषित कर दिया गया है। कामेश्वर सिंह, भरत सिंह, नीलम उपाध्याय, समीर सिंह, कालिंदी द्विवेदी आदि ने जीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली सुनवाई कमेटी के सामने अपना पक्ष रखा। कहा कि वर्ष 1954 से महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो प्रदेश सरकार की अधिसूचना के अनुसार शहरी क्षेत्र है।
पूर्व में शासन-प्रशासन ने इस क्षेत्र की जमीन को सीलिंग का बताकर अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की थी। इस पर क्रमश: हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा था कि मौके पर बड़ी संख्या में आवास बन गए हैं और खाली जमीन नहीं रह गई है। ऐसे में सीलिंग की कार्यवाही गलत है। उन्होंने यह भी दलील पेश की कि सांसद रहते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व अन्य विधायक अपनी निधि से स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए रोड आदि के निर्माण के लिए फंड स्वीकृत कर चुके हैं।