स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरहिता करीम का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्भावस्था में खून की कमी होने से महिलाएं कुपोषण का शिकार हो जाती हैं। इस वजह से मां के साथ बच्चे को भी खतरा रहता है। डॉ. सुरहिता आइसोपार्ब द्वारा आयोजित मिड टर्म कांफ्रेंस के दूसरे दिन रविवार को स्टीलबर्थ पर व्याख्यान दे रहीं थीं।
कांफ्रेंस में डॉ. सीमा शाही ने बताया कि गर्भावस्था में महिलाओं को अगर शुगर हो जाता है तो वह ज्यादा खतरनाक हो जाता है। इससे मां के साथ बच्चे की जान को खतरा रहता है। शुगर की वजह से गर्भपात, समय से पहले प्रसव और संक्रमण होने का खतरा अधिक रहता है। सिजेरियन डिलीवरी की आशंका बढ़ जाती है।
डॉ. अमृता सरकारी जयपुरियार ने बताया कि गर्भावस्था की शुरुआती में जांच से पता लग सकता है कि गर्भवती को बाद में अधिक रक्तचाप होने की आशंका है या नहीं। जांच में महिला हाई रिस्क में आती हैं तो पहले से दवा दे दी जाती है। इससे बीपी नियंत्रित रखा जाता है। अगर ब्लड प्रेशर नियंत्रित हो जाता है तो मां और बच्चे को खतरा कम हो जाता है। अधिक रक्तस्राव से हेल्प सिंड्रोम का खतरा भी होता है। सही समय पर इलाज से इसे दूर किया जा सकता है।
डॉ दीप्ती चतुर्वेदी ने बताया कि गर्भावस्था में कई तरह के वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकते हैं। इस वजह से भी बच्चे का पेट में या डिलीवरी के बाद निधन हो सकता है। ऐसे इन्फेक्शन में टॉर्च, सिफीलिस, जीका वायरस, पर्वो वायरस, हरपीज वायरस, चिकन पॉक्स शामिल हैं। गर्भावस्था में इंफेक्शन होने से मां और शिशु दोनों पर प्रभाव पड़ता है।
कार्यक्रम में डॉ अरुल कुमारन, डॉ पीसी महापात्रा, डॉ मंदाकिनी, डॉ सुरेश, डॉ मुरलीधर पाई, डॉ सविता, डॉ सरिता अग्रवाल, डॉ किरण पांडेय, डॉ साधना गुप्ता, डॉ रीना श्रीवास्तव, डॉ मधु गुलाटी, डॉ अरुणा छपरिया, डॉ राजेश गुप्ता, डॉ सुनील कमानी, डॉ मधुबाला एवं डॉ अनुभा गुप्ता भी मौजूद रहीं।