इसके लिए इन सभी जिलों में कलेक्शन सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया है। गांव-गांव पशुपालकों की समितियां बनाई जाएंगी। पशुपालक अपने क्षेत्र के कलेक्शन सेंटर पर लाकर दूध बेच सकेंगे। वहां मौजूद कर्मचारी दूध की गुणवत्ता जांच करेंगे। इसी आधार पर दूध की कीमत तय होगी।
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गोरखपुर महाप्रबंधक ज्ञान डेयरी जीपी तिवारी ने कहा कि गोरखपुर की फैक्टरी में हर दिन पांच लाख लीटर दूध की खपत होगी, जिसकी आपूर्ति स्थानीय व आसपास के पशुपालकों से ही की जाएगी। इसके लिए गांव-गांव समितियों का गठन किया जाएगा। कलेक्शन सेंटर और उत्पाद बिक्री के लिए आउटलेट भी खोले जाएंगे। एक साल के अंदर एक लाख किसानों से सीधे दूध खरीदने की योजना है। इसका पूरा लाभ पूर्वांचल के पशुपालकों व दूध विक्रेताओं को मिलेगा।