इसके बाद किराने की दुकान पर गुरुजी जी ने ताला लटका दिया। डर-सहम कर ब्याज देने में असमर्थ व्यापारी घर छोड़कर नेपाल चला गया। ऐसे ही राजेंद्रनगर के एक जमीन कारोबारी को भी 15 लाख रुपये ब्याज पर दिए गए थे। वर्तमान में देनदारी 25 लाख रुपये हो गई है। विनोद की मौत के दो दिन पहले ही उसके सहयोगी की ओर से ब्याज न दिए जाने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दी गई थी। इसके अलावा गुरुजी ने पीपीगंज के एक सरकारी कर्मचारी को भी पांच लाख रुपये ब्याज पर दिलवाया था। आठ लाख रुपये कर्मचारी पर देनदारी लग चुकी है।
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पांच लाख कारतूस खर्च दिखाया तो कर लिया था किनारा
गोरखपुर से फरेंदा के बीच स्थित सरुआताल से मछली पकड़ने के काम पर विनोद और उसकी टीम का कब्जा था। यहां से मछलियों के अवैध कारोबार के साथ प्रतिदिन की वसूली होती थी। सूत्रों की मानें तो छह से सात वर्ष पहले इसमें गुरुजी ने पांच लाख रुपये का खेल कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि पैरवी के दौरान विनोद ने जब रुपये का हिसाब लिया तो गुरुजी ने पांच लाख रुपये कारतूस खरीदने में खर्च होने की बात कही। दस दिन बाद ही उसने वापस लौटा दिए। हालांकि तभी से माफिया ने गुरुजी से किनारा कर लिया।
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परिवारवाले अब इन रुपयों के लिए तरस न जाएं
सूत्र बताते हैं कि विनोद ने कई जमीनों की रजिस्ट्री गुरुजी और तीन अन्य सहयोगियों के नाम पर करवाई थी। विनोद का छोटा भाई संजय जेल में है। बड़े भाई की तबीयत खराब है। दो अन्य भाई अपराध से दूर रहे हैं। विनोद का एक साला है, जो धंधों में साथ रहता था। जबकि, पत्नी और बच्चे दिल्ली रहते थे। ऐसे में चर्चा यह भी है कि विनोद की काली कमाई शायद ही परिवार को मिल पाए।