स्कूली बच्चों को विश्वविद्यालय घुमाएं
कुलाधिपति ने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि आज गोल्ड मेडल पाने वाले पीछे बैठे हैं और छोटे बच्चे पहली लाइन में। स्कूलों के बच्चों को विश्वविद्यालय लेकर आएं। यहां लैब, पुस्तकालय, नवाचार देखेंगे तो अभी से कुछ नया करने की सोच विकसित होगी।
छात्रों को अयोध्या व काशी ले जाएं
कुलाधिपति ने कहा कि छात्रों को काशी व अयोध्या घुमाने की जरूरत है। कुलपति काशी में हुए बदलाव पर पर्चा छपवा कर छात्रों में बांट सकते हैं। इससे जानकारी बढ़ेगी। मैं, दो दिन वाराणसी में रहीं हूं। छात्र वहां जाएंगे तो देखेंगे कि कैसे समय प्रबंधन से काम होता है। काशी कारीडोर बनाने में क्या-क्या दिक्कतें आई होंगी, कैसे उसका समाधान निकला होगा। तकनीकी का प्रयोग कैसे हुआ? इसी प्रकार अयोध्या का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 50 फीट नीचे जब बालू मिला तो फाउंडेशन के लिए क्या तकनीक अपनाई गई? तीन महीने तक कैसे विशेषज्ञों ने मंथन किया? यह देखेंगे और जानेंगे तो सोच बदलेगी। विश्वविद्यालय इस कार्य में आगे बढ़ें।
प्रोत्साहित करना भी शिक्षा का हिस्सा
कुलाधिपति ने कहा कि प्रेरणा देना और प्रोत्साहित करना भी शिक्षा का हिस्सा है। अगर कोई बढ़िया प्रवचन है तो उसे छात्रों को सुनाना चाहिए। कुलपतियों की बैठक में मैं, तो अक्सर प्रवचन सुनाती हूं। आजादी का अमृत महोत्सव के प्रवचन भी छात्रों को सुनाएं।
सामाजिक बुराइयां प्रोजेक्ट का हिस्सा बनें
कुलाधिपति ने कहा कि सोच में बदलाव के लिए छात्रों को जेल की यात्रा कराएं। वहां जाकर देखें कि कितनी महिलाएं जेल में हैं। किस लिए वह जेल गईं। इन समस्याओं पर भी शोध कराएं। सामाजिक बुराइयों को विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाएं। साल भर में इसका भी कैलेंडर बनना चाहिए।