योग व प्राणायाम से मिल सकता है आराम
मधुमेह रोग हार्माेंस के अनियंत्रित स्राव के चलते होता है। इंसुलिन को संतुलित रखने के लिए खुद को फिट रखना जरूरी है। इसके लिए अनुलोम-विलोम की क्रिया होती है। लेकिन इसके करने से पहले शरीर के अन्य सभी अंगों को सक्रिय करने के लिए कुछ आसान और भी करने होते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क को एकाग्रचित्त व शांत रखने के लिए भी कुछ योगाभ्यास व प्राणायाम आदि कराए जाते हैं। ये सभी क्रियाएं नियमित अभ्यास से आसान हो जाती हैं।
इसी प्रकार उच्च रक्तचाप के लिए भी अनियमित दिनचर्या ही जिम्मेदार है। इन दोनों बीमारियों पर नियंत्रण के लिए योग व प्राणायाम सबसे बेहतर माध्यम है। इसके अलावा अपने भोजन पर भी नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। आयुर्वेद ही नहीं ऐलोपैथ के विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आहार का स्वास्थ्य पर सीधा असर होता है।
दिनचर्या नियमित रखना सबसे जरूरी
पतंजलि योग पीठ के जिला प्रभारी हरिनारायण दूबे बताते हैं कि शरीर को फिट रखने के लिए हमें वात, कफ व पित्त को नियंत्रित करना होता है। वात पर नियंत्रण के लिए नियमित तौर पर भोर में साढ़े तीन से पांच बजे के बीच उठना और नित्यक्रिया से निबटना जरूरी है। कफ को नियंत्रित करने के लिए शारीरिक व्यायाम कराया जाता है।
वहीं पित्त को नियंत्रित करने के लिए सुबह साढ़े आठ बजे तक भोजन करना होता है। सायंकाल भी इसी प्रकार से वात, कफ व पित्त को नियंत्रित किया जाता है। आहार व दिनचर्या के बीच संतुलन जरूरी है। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि भोजन के जरिए जितनी उर्जा शरीर को मिल रही है, उतनी खपत भी होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो भी शरीर अस्वस्थ हो जाएगा।