सुपर-100 के तहत चयनित छात्रों की फीस, छात्रावास, मेस सुविधा निशुल्क है। प्रति खिलाड़ी पर एक दिन भोजन के लिए 250 रुपया खर्च किए जाते हैं। उन्हें निशुल्क किट भी दी जाती है। चर्चा है कि इस पूरी योजना पर करीब एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। इसके बाद भी पिछले दो वर्षों में एक अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में आठ सदस्यीय खोखो टीम ने सिर्फ कांस्य पदक जीता। अन्य खिलाड़ियों ने कहां-कहां प्रतिभाग किया, इसका भी कमेटी द्वारा रिकॉर्ड खोजा जा रहा है।
इसे भी पढ़ें: लाखों डकार कर बैठे थे...कार्रवाई शुरू की तो हर गली-गली पर मिलने लगे भू माफिया
योग के प्रशिक्षक दे रहे थे कोचिंग
इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दो कोच रखे गए थे। एक कोच की विशेषज्ञता योग प्रशिक्षक की थी। दूसरे कोच एथलेटिक्स के थे। दोनों को अधिकतम 25 हजार रुपये मानदेय पर रखा गया था। इस योजना पर आउटकम के लिए एक खेल सलाहकार भी रखे गए थे। चर्चा है उन्हें प्रतिमाह 75 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा था।
सूत्रों के मुताबिक कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी गठित करते हुए तीन साल की रिपोर्ट मांगी है। खिलाड़ियों के ट्रायल के लिए अपनाई गई विधि, उपलब्धियां, कार्य, छात्रों की उपस्थिति और बजट को जांच के केेंद्र में रखा गया है।
ऐसे खुला मामला
सुपर-100 के तहत चयनित 22 खिलाड़ियों के लिए गेस्ट हाउस के मेस में भोजन की व्यवस्था की गई थी। तीन दिन पहले मेस से उनके लिए आवंटित रकम खत्म होने की जानकारी देकर भोजन देने से मना कर दिया गया। इसके बाद परेशान खिलाड़ी कुलपति से मिलने पहुंचे। तब यह मामला प्रकाश में आया।
गोविवि कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने कहा कि सुपर-100 के तहत हुए चयन और खर्च की जांच के लिए समिति गठित की गई है। जांच चल रही है। आर्डिनेंस के हिसाब से वार्षिक मूल्यांकन होना चाहिए था। दो वर्षों से नहीं हुआ है। इस बार दोनों वर्ष का होगा।