विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रो. पूनम टंडन के सामने छात्र अंकपत्र और डिग्री नहीं मिलने की समस्या लेकर पहुंचे। उन्होंने तत्काल परीक्षा नियंत्रक, एजेंसी समेत अन्य जिम्मेदारों से बैठक कर अंकपत्र और डिग्री नहीं मिल पाने के कारणों को जान सभी को शीघ्र निस्तारण का डिग्री व अंकपत्र दिलाने का निर्देश दिया। परिणाम स्वरूप उनकी ज्वाइनिंग के 40 दिन के अंदर ही 81 हजार डिग्रियां छप कर आ गई। इसमें सत्र 2021-22 के सभी 72 हजार डिग्रियां शामिल है। इसके अलावा पिछले महीने 18 सितंबर को हुए दीक्षांत समारोह में स्नातक के 11 पाठ्यक्रमों के करीब नौ हजार छात्रों की भी डिग्री छप कर आ गई है।
छात्रों को अब नहीं आना होगा विश्वविद्यालय
डिग्री या अंकपत्र के लिए अब छात्रों को विश्वविद्यालय नहीं आना पड़ेगा। कुलपति ने अंकपत्र और डिग्री को उसके संबंधित विभाग या महाविद्यालय से देने का निर्देश दिया है। इसके अंतर्गत सभी डिग्रियों को महाविद्यालय और संबंधित विभाग भेजने की तैयारी की जा रही है। छात्र अब विभाग और महाविद्यालय से ही डिग्री प्राप्त कर सकेंगे। अब उनको विश्वविद्यालय दौड़ कर नहीं आना पड़ेगा। इसका लाभ देवरिया, कुशीनगर और गोरखपुर के दूर-दराज छात्रों को मिलेगा।
गोविवि परीक्षा नियंत्रक डॉ. कुलदीप सिंह ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2021-22 की 72 हजार और सत्र 2022-23 की नौ हजार डिग्रियां छप कर आ गई है। उनको संबंधित विभाग और महाविद्यालय भेजने की तैयारी की जा रही है। छात्रों को अब डिग्री के लिए विश्वविद्यालय दौड़ कर नहीं आना पड़ेगा।
दीक्षांत में ही मिल जाए छात्रों को डिग्री, ऐसी होगी व्यवस्था : कुलपति
गोविवि की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा है कि जल्द ही डिग्री की व्यवस्था दुरुस्त कर दी जाएगी। दीक्षांत समारोह में छात्र के हाथ में डिग्री रहे इसकी व्यवस्था की जा रही है। धीरे-धीर व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, जल्द ही डिग्री के बैकलॉग पर भी नियंत्रण पा लिया जाएगा। 81 हजार डिग्रियां छप कर आ गई हैं। उसे विभागवार व कॉलेज पर भेजा जा रहा है, जहां से छात्र अपनी डिग्री को प्राप्त कर सकेंगे।