गोरखपुर जिले में पिछले कई दिनों से नेपाल की पहाड़ी से लेकर मैदानी भागों में बारिश नहीं होने का असर नदियों पर दिखाई देने लगा है। लगभग सभी नदियों के उफान में कमी आ गई है। सबसे अधिक डराने वाली राप्ती नदी का जलस्तर पर भी नीचे आ रहा है। घाघरा नदी खतरे के निशान से नीचे बहने लगी है। वहीं, तेज हवा चलने से नदियों में लहर उठने लगी है। इससे तटबंधों में तेज कटान होने लगी है। यह स्थिति चिंता में डालने वाली हो गई है।
जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटे में राप्ती नदी का जलस्तर 17 सेमी नीचे आया है। हालांकि वह अब भी खतरे के निशान से 1.87 मीटर ऊपर बह रही है। रोहिन नदी का जलस्तर 24 घंटे में 59 सेमी नीचे आया है। वह शाम चार बजे तक खतरे के लाल निशान पर आकर स्थिर हो गई थी। राप्ती की सहायक नदी गोर्रा भी नीचे आ रही है, लेकिन वह खतरे के निशान से 1.45 मीटर ऊपर बह रही है। घाघरा दो दिन से खतरे के निशान से 36 सेमी नीचे बह रही है। फिर भी सिंचाई विभाग के इंजीनियर बंधों पर डटे हैं।
बाढ़ खंड-2 के अधिशासी अभियंता रुपेश कुमार खरे ने कहा कि सभी नदियों का जलस्तर नीचे आ रहा है, लेकिन सतर्कता उसी तरह से बनी हुई है। तेज हवा के कारण बंधों के किनारे पानी की लहर उठ रही है। इससे तटबंधों पर कई स्थानों पर कटान हो रही है। पेड़ की डालियां आदि डालकर कटान को रोका जा रहा है। एक सप्ताह तक सतर्क रहना है। जेई-एई बंधों पर रह रहे हैं। एक्सीईएन व एसई तथा चीफ इंजीनियर देर रात तक बंधों पर जाकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं।