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लापरवाही: गोरखपुर-वाराणसी मार्ग की धीमी रफ्तार पर डीएम ने फर्म को थमाया नोटिस, बोले- शासन-प्रशासन से लगातार बोला जा रहा था झूठ

Wed, 08 Sep 2021 02:35 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

संसाधन मौजूद फिर भी नहीं कर रहे पूरा इस्तेमाल, स्पष्टीकरण एवं अनुपालन आख्या के लिए दस दिन की दी गई मोहलत, फिर कार्रवाई के लिए लिखेंगे डीएम।
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डीएम विजय किरन आनंद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन निर्माण की धीमी रफ्तार पर डीएम विजय किरन आनंद ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए काम कराने वाली फर्म को नोटिस जारी किया है। डीएम का कहना है कि फोरलेन का निर्माण कार्य पूरा करने की समयावधि को लेकर फर्म लगातार शासन-प्रशासन से झूठ बोल रही है। फर्म के पास पर्याप्त संसाधन हैं मगर वह इसका पूरा इस्तेमाल नहीं कर रही है। इस वजह से काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। उन्होंने नोटिस का जवाब देने के 10 दिन की मोहलत दी है। साथ ही चेताया है कि तय समयावधि में यदि स्पष्टीकरण और अनुपालन आख्या नहीं उपलब्ध कराई गई तो फर्म के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को लिखा जाएगा।  

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करीब एक दशक से बन रही इस सड़क की धीमी रफ्तार को लेकर सीएम से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक से नाराजगी जताई जा चुकी है। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में फर्म लगातार निर्माण कार्य पूरा करने के लिए नई तिथि तय करती है मगर काम की रफ्तार नहीं बढ़ा रही। पिछले सप्ताह बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिर इस मार्ग के निर्माण की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जताई थी।

डीएम का कहना है कि उन्होंने भी गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का बाघागाड़ा से कौड़ीराम तक का निरीक्षण किया था। इस दौरान कार्य की प्रगति, निर्धारित कार्य योजना के अनुसार नहीं मिली। मौजूदा सड़क के रखरखाव की स्थिति अत्यंत खराब थी जिससे यह साफ होता है कि यहां पर केवल कार्ययोजना की कमी और गलत प्रबंधन के कारण कार्य में अपेक्षित प्रगति नही हो रही है।
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डीएम ने निर्देश दिए हैं कि प्राथमिकता के आधार पर कमियों को ठीक कराया जाए साथ ही जिन स्थलों पर यातायात संचालन में कठिनाई हो रही हो वहां पर वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए गिट्टी पटाई का कार्य कराया जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना शासन की प्राथमिकताओं में से है जिसकी प्रगति समीक्षा समय-समय पर उच्च स्तर से की जाती है। बावजूद इसके फर्म द्वारा उच्चस्तरीय बैठकों में समयबद्ध रूप से कार्य पूर्ण कराने का आश्वासन भी दिया गया है इसके बावजूद भी कार्य में अपेक्षित सुधार न होना फर्म की घोर लापरवाही है। इस संबंध में कार्यदायी फर्म के अधिकारियों का पक्ष नहीं मिल सका है। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
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