जीडीए के मुताबिक ठेका पानी वाली फर्म ने अब तक सिर्फ 5 करोड़ 19 लाख 69 हजार रुपये ही जमा किए हैं,। बकाये को लेकर प्राधिकरण ने समिति को नोटिस दे रखा है। मछली मारने पर रोक लगा दी गई है। ठेका निरस्त करने की भी चेतावनी दी गई है।
ठेके लेने वाली समिति को स्टांप शुल्क के भी 94 लाख जमा करने होंगे
रामगढ़ताल में मछली का ठेका हासिल करने वाली मत्स्य जीवी सहकारी समिति को स्टांप शुल्क के भी 94.60 लाख रुपये रजिस्ट्री कार्यालय में जमा कराने हैं। स्टांप शुल्क कमी के निर्धारण के बाद इसे जमा करने को लेकर डीएम कोर्ट की तरफ से 17 मार्च 2021 को ही आदेश जारी हुआ था। समिति ने इस आदेश के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट में निगरानी दाखिल की थी। हाल ही में मामले की सुनवाई के दौरान कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने निगरानी खारिज करते हुए डीएम कोर्ट के फैसले को सही बताया और स्टांप कमी के शुल्क के साथ ही छह फरवरी 2020 से डेढ़ फीसदी मासिक ब्याज भी जमा करने का आदेश पारित किया है।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि समिति ने एक सप्ताह में बकाए की रकम जमा करने का आश्वासन दिया था, मगर ये समय भी बीतने को है। समिति जब तक रुपये नहीं जमा करेगी, उसे मछली मारने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ज्यादा देर करने पर अब ठेका भी निरस्त कर दिया जाएगा। ठेके के लिए हुई नीलामी के समय तत्कालीन अफसरों को भी यह थोड़ा गौर करना चाहिए था कि मछली से इतनी बड़ी रकम मिल पाएगी भी या नहीं।
कूड़ाघाट मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ उर्फ महेरवा की बारी के सचिव सुनील निषाद ने कहा कि मार्च, अप्रैल और मई में ही मछली का प्रजनन होता है। उसी दौरान पिछले साल और इस साल भी लॉकडाउन लग गया। गाड़ियों का संचालन आदि सब बंद हो गया। करीब आठ महीने तक तो मछली पकड़ने का काम पूरी तरह ठप रहा है। किसी तरह मई-जून 2021 में करीब 900 क्विंटल मछली के बच्चे डाले गए। बारिश के मौसम में इतनी बरसात हुई कि ताल से काफी मछलियां भी बह गईं। बहुत नुकसान हुआ। जलकुंभी की वजह से भी मछली नहीं मारी जा सकी। बहुत जतन के बाद ठेका मिला है। समिति जल्द ही जीडीए का बकाया जमा कर देगी। लॉकडाउन को देखते हुए जीडीए से कुछ राहत मांगी जा रही है।