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गोरखपुर रामगढ़ताल मछली ठेका: लालच में बढ़ती रही बोली, अब आधा मिलना मुश्किल पूरा जाएं भूल

Tue, 14 Sep 2021 11:47 AM IST
vivek shukla अरुण चंद, गोरखपुर।

सार

पिछली बार 2.60 करोड़ में ही हुआ था पांच साल का ठेका, इस बार रकम बढ़कर 22.79 करोड़ रुपये हुई, ठेका पाने वाली फर्म ने अभी 5.19 करोड़ ही दिए, बकाए के कारण मछली पकड़ने पर लगी रोक।
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रामगढ़ताल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर में रामगढ़ताल में  मछली पकड़ने का ठेका 2.60 करोड़ के सापेक्ष 22.79 करोड़ रुपये में फाइनल करने की तत्कालीन अधिकारियों की होशियारी अब गोरखपुर विकास प्राधिकरण पर भारी पडने लगी है। 2019 में आवंटित इस ठेके की पूरी रकम को कौन कहे, आधी मिलेगी इसमें भी शक है। ठेका पाने वाली मत्स्यजीवी समिति तीन साल में ठेके की पूरी रकम अदा करने की शर्त के विपरीत अब तक केवल 5.19 करोड़ रुपए जमा करने में ही हांफ गई है। बकाये पर जीडीए ने  समिति को नोटिस थमाकर, ताल में मछली मारने पर रोक लगा दी है। साथ ही टेंडर निरस्त करने की भी तैयारी शुरू हो गई है।

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जानकार कहते हैं कि तत्कालीन अधिकारियों ने अव्यावहारिक कीमत पर टेंडर फाइनल किया, नतीजा यही निकलना था। वहीं, टेंडर निरस्त करने की तैयारी की सूचना से बेचैन होकर जीडीए के चक्कर लगा रही समिति के संचालकों का कहना है कि जल्द ही बकाया धनराशि जमा करा दी जाएगी। उनकी दलील है कि हर साल मार्च, अप्रैल और मई में ही मछलियों के प्रजनन का समय होता है। ठीक इसी समय पिछले साल यानी 2020 और इस साल भी कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन लग गया, जिससे मछली के बच्चे नहीं डाले जा सके। उधर जलकुंभी की वजह से मछली नहीं पकड़ी जा सकी, जिससे बहुत आय नहीं हुई।

पांच साल के लिए हुआ है टेंडर, तीन साल में ही देनी है रकम
एक अप्रैल 2019 को मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ उर्फ महेरवा की बारी, कूड़ाघाट को 22.79 करोड़ में रामगढ़ताल में मछली पकड़ने का ठेका मिला था। अनुबंध के तहत समिति 28 जून 2024 तक मछली पकड़ सकती है। अनुबंध में प्राधिकरण ने समय-समय पर एक निश्चित राशि भी जमा करने की शर्त लगाई है। पहले और दूसरे साल 40-40 फीसदी और तीसरे साल बाकी बची 20 फीसदी रकम जमा करनी है। यानी समिति को तीन साल में पूरी रकम 22.79 करोड़ रुपये जमा करनी है।
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अब तक 5.19 करोड़ ही जमा कर सकी है फर्म

जीडीए के मुताबिक ठेका पानी वाली फर्म ने अब तक सिर्फ 5 करोड़ 19 लाख 69 हजार रुपये ही जमा किए हैं,। बकाये को लेकर  प्राधिकरण ने समिति को नोटिस दे रखा है। मछली मारने पर रोक लगा दी गई है। ठेका निरस्त करने की भी चेतावनी दी गई है।

ठेके लेने वाली समिति को स्टांप शुल्क के भी 94 लाख जमा करने होंगे
रामगढ़ताल में मछली का ठेका हासिल करने वाली मत्स्य जीवी सहकारी समिति को स्टांप शुल्क के भी 94.60 लाख रुपये रजिस्ट्री कार्यालय में जमा कराने हैं। स्टांप शुल्क कमी के निर्धारण के बाद इसे जमा करने को लेकर डीएम कोर्ट की तरफ से 17 मार्च 2021 को ही आदेश जारी हुआ था। समिति ने इस आदेश के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट में निगरानी दाखिल की थी। हाल ही में मामले की सुनवाई के दौरान कमिश्नर रवि कुमार एनजी ने निगरानी खारिज करते हुए डीएम कोर्ट के फैसले को सही बताया और स्टांप कमी के शुल्क के साथ ही छह फरवरी 2020 से डेढ़ फीसदी मासिक ब्याज भी जमा करने का आदेश पारित किया है।

जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि समिति ने एक सप्ताह में बकाए की रकम जमा करने का आश्वासन दिया था, मगर ये समय भी बीतने को है। समिति जब तक रुपये नहीं जमा करेगी, उसे मछली मारने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ज्यादा देर करने पर अब ठेका भी निरस्त कर दिया जाएगा। ठेके के लिए हुई नीलामी के समय तत्कालीन अफसरों को भी यह थोड़ा गौर करना चाहिए था कि मछली से इतनी बड़ी रकम मिल पाएगी भी या नहीं।

कूड़ाघाट मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ उर्फ महेरवा की बारी के सचिव सुनील निषाद ने कहा कि मार्च, अप्रैल और मई में ही मछली का प्रजनन होता है। उसी दौरान पिछले साल और इस साल भी लॉकडाउन लग गया। गाड़ियों का संचालन आदि सब बंद हो गया। करीब आठ महीने तक तो मछली पकड़ने का काम पूरी तरह ठप रहा है। किसी तरह मई-जून 2021 में करीब 900 क्विंटल मछली के बच्चे डाले गए। बारिश के मौसम में इतनी बरसात हुई कि ताल से काफी मछलियां भी बह गईं। बहुत नुकसान हुआ। जलकुंभी की वजह से भी मछली नहीं मारी जा सकी। बहुत जतन के बाद ठेका मिला है। समिति जल्द ही जीडीए का बकाया जमा कर देगी। लॉकडाउन को देखते हुए जीडीए से कुछ राहत मांगी जा रही है।
 
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