प्रगति की सफलता से व्यापारी पिता राकेश अग्रवाल, गृहिणी मां शिखा अग्रवाल, बहन प्रकृति अग्रवाल और बाबा अशोक कुमार अग्रवाल गदगद हैं। पिता का कहना है कि दो बेटियां ही हैं। दोनों की पढ़ाई प्राथमिकता है। कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि बेटियां किसी से कम होती हैं।
इसे प्रगति भी स्वीकार करती हैं। वह कहती हैं कि, माता-पिता के सहयोग से ही सफलता दर सफलता मिलती चली गई। प्रगति ने सफलता का श्रेय एकेडमिक ग्लोबल स्कूल के निदेशक संजीव कुमार को भी दिया और कहा कि बेहतरीन मार्गदर्शन से ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आसान हो गई। वह रोजाना छह से सात घंटे पढ़ाई करती हैं।
ऑल टाइम टॉपर हैं प्रगति
प्रगति अग्रवाल ऑल टाइम टॉपर हैं। कक्षा एक से नौ तक क्लास में अव्वल रहीं। दसवीं और बारहवीं में भी टॉपर बनीं। सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में प्रयागराज जोन की टॉपर बनकर गोरखपुर का मान बढ़ाया। जेईई मेन में भी श्रेष्ठ परसेंटाइल प्राप्त किया। अब जेईई एडवांस में चयनित होकर माता-पिता का मान बढ़ाया है। प्रगति को कई स्कालरशिप भी मिल चुकी है। नेशनल टैलेंट सर्च एग्जाम (एनटीएसई), किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना (केवीपीआई) और साइंस ओलंपियाड में भी सफलता हासिल की थी।
सफलता का मंत्र
कड़ी मेहनत व लगन का कोई विकल्प नहीं है। कक्षा में शिक्षक जो बताएं, उसे ध्यान से सुनें। आत्मसात करें। मॉक टेस्ट देने का फायदा मिलता है। तैयारी और बेहतर होती है। सतत पढ़ाई जरूरी है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक दिन ज्यादा पढ़ें और दूसरे दिन कम। लक्ष्य तय करने के साथ ही योजना बना लें कि इतने घंटे रोज पढ़ना है। इससे भविष्य की राह आसान होगी।
पर्सनल प्रोफाइल
नाम: प्रगति अग्रवाल
जन्म तिथि-10 अगस्त 2004
10वीं- 94.6 फीसदी
12वीं- 99.4 फीसदी
जेईई मेन- 99.96 परसेंटाइल
जेईई एडवांस- आल इंडिया रैंक 545
स्कूल- एकेडमिक ग्लोबल स्कूल जंगलधूसड़
पसंद- खाना बनाना और बैडमिंटन खेलना
फिजिक्स में सबसे ज्यादा मार्क्स
जेईई एडवांस का पेपर 360 मार्क्स का था। इसमें से प्रगति ने 190 मार्क्स हासिल किए हैं। फिजिक्स में सबसे ज्यादा 70 मार्क्स मिले हैं। केमिस्ट्री में 68 और मैथ में 52 मार्क्स मिले हैं।
सोशल मीडिया से दूरी
12वीं की पढ़ाई और जेईई एडवांस का पेपर देने तक प्रगति ने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। फोन का इस्तेमाल भी कम किया। पढ़ाई से जुड़ी जानकारी के लिए जब भी जरूरत पड़ी, तब माता-पिता के मोबाइल फोन का सहारा लिया। प्रगति का कहना है कि कोरोना संकट के बीच टेक्नोलॉजी की महत्व समझ में आया था। कक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी ऑनलाइन ही करनी पड़ी थी।