पुलिसकर्मी भी इंसान हैं, डर उन्हें भी लगता है मगर अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए वे लोगों तक मदद पहुंचा रहे हैं। ऐसे समय में जब कोरोना मरीज से अपने भी मुंह मोड़ ले रहे हैं या किसी को सवारी नहीं मिल रही लोग पुलिस को याद कर रहे हैं। पुलिसकर्मी भी जरूरतमंदों को निराश नहीं कर रहे हैं।
केस एक
तिवारीपुर इलाके के एक ही परिवार के चार लोग कोरोना संक्रमित हैं। नौ मई को अचानक घर के एक बुजुर्ग की हालत खराब हो गई। दवा की जरूरत थी जो घर पर मौजूद नहीं थी। घर से निकलने की किसी की हिम्मत नहीं हुई तो घर के एक सदस्य आशुतोष ने पुलिस से बात की। पुलिसकर्मी ने पर्चा लेकर दवा उपलब्ध कराया।
केस दो
कोरोना कर्फ्यू के चलते 18 अप्रैल को मेडिकल रोड निवासी चेतन उपाध्याय को सवारी नहीं मिल रही थी। उन्हें बनारस जाना था। पहले तो सगे संबंधियों से
संपर्क किया, मदद नहीं मिली तो डॉयल 112 पर संपर्क किया। पीआरवी 0321 के पुलिसकर्मी ने खुद की गाड़ी से उन्हें रेलवे स्टेशन छोड़ा।
केस तीन
अलीनगर में एक काम करने वाली महिला की मौत हो गई थी। जिस घर में वह काम करती थी उस घर के लोग कोरोना से मौत की वजह से शव को छूना नहीं चाहते थे। आखिर में एडीजी से मदद मांगी गई। एडीजी ने एसएसपी से बाचतीत की जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने घर को सैनेटाइज कराने के साथ ही कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए महिला का दाह संस्कार कराया।