कोटेदार रेखा देवी का निधन
मुरारपुर गांव की कोटेदार रेखा देवी का शनिवार को निधन हो गया। रेखा के पति राजनारायण यादव ग्राम प्रधान हैं। बताया गया कि रेखा की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। परिजनों ने कोटेदार को अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान ही रेखा का निधन हो गया।
पचमा गांव में मातम
कैंपियरगंज क्षेत्र के पचमा गांव में पंचायत चुनाव यानी 15 अप्रैल के बाद 12 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक टिसुरी (60), हजरत अली (70), रसूलबानो (75), शमीना (60), शाहिद( 48), यूसुफ (70), नंदू सहानी (62), बर्फी (55), यशोमती (60), मदीना (80), जगपाती (55), अनवारुल (50) सहित अन्य की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य महकमा बेखबर है।
मौत के बाद भी नहीं चेता स्वास्थ्य महकमा
गोला विकास खंड के ग्राम सभा पतरा में 20 दिनों के अंदर 12 मौतें हो चुकी हैं। ग्राम प्रधान रोहित चौहान ने बताया कि बुखार, सर्दी, खांसी व सांस फूलने की शिकायत करने वालों की मौतें हुई हैं। इसमें गोपीनाथ (80), अनिल शर्मा (52), लाल बहादुर (80), तूफानी, मुनीब, बलजीत चौहान, सियाराम चौहान, शिल्पी, अतवारी देवी सहित अन्य के नाम शामिल हैं। इसकी जानकारी विकास खंड प्रशासन व स्वास्थ्य महकमे को दी गई है, फिर भी कोई सुधि लेने वाला नहीं है।
बुखार-जुकाम हुआ और हो गई मौत
गगहा विकास खंड की ग्राम सभा कौवाडील में भी कई मौतें हुई हैं। जानकारी के मुतरबिक विजय शंकर शर्मा (56), प्रसिद्ध नाथ शर्मा (58), छोटेलाल शर्मा (60), चानबली शर्मा (62), रूदल यादव (25) सहित कई की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक इन सबको बुखार, जुकाम व खांसी हुई थी। मौतें के बाद भी गांव का सैनिटाइजेशन नहीं कराया गया है। स्वास्थ्य विभाग भी ध्यान नहीं ले रहा है। अतायर गांव में भी कई लोगों की मौत हुई है।
ओझवली गांव में 20 दिन के अंदर 20 से ज्यादा मौतें
बड़हलगंज विकास खंड के ओझवली गांव में 20 दिन के भीतर 20 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। इससे गांव में मातम पसरा है। भयग्रस्त ग्रामीण घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक 20 दिन के भीतर ही पति विजय नारायण (72) व उनकी पत्नी मुराती (70) की मौत भी हुई थी। इन दोनों की चिताएं एक साथ जली थी। इसी तरह कमलावती (57), कुंता (42), उमाशंकर शुक्ल (50), चंपा (75), पुष्पा (26), सावित्री (58), महेंद्र (82), आशा (58), चंद्रभान (60), ब्रह्मानंद (60), किशोर (58), इंद्रदेव (80), रमेश गुप्ता (52), फूलमती (68), कमालवती (57), झीनकी (90), आरती (48), बेनीमाधव ओझा (62), नंदलाल (63), लालचंद्र (67), बैजनाथ ओझा (60), रामेश्वर ओझा (64), मुनाकी देवी (72), स्वतंत्र (28), तारा देवी (62) का नाम शामिल है। ग्रामीण दहशतजदा हैं। सब कोविड टेस्ट और गांवों का सैनिटाइजेशन करवाना चाहते हैं।
स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक नहीं, कैसे मिले इलाज
झंगहा के ग्राम सभा जंगल गौरी नंबर दो में पिछले 15 दिनों के अंदर कई लोगों की मौतें हुई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक तेज बुखार के बाद त्रिलोकी नाथ यादव, बलराम शुक्ला, लालती देवी, रंगलाल, अकाली देवी, तूफानी पासवान, सुरेश ने दम तोड़ा है। इस क्षेत्र के अमहिया में स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन डॉक्टर की तैनाती नहीं है। दवाओं का संकट बना रहता है। पूरा स्वास्थ्य केंद्र वार्ड ब्वाय के भरोसे चलता है।
पहले बेटे, फिर बाप ने दम तोड़ा
कसिहार क्षेत्र के मझिगावा गांव में पहले बेटे दीप नारायण शुक्ला की मौत हुई थी। पांचवें दिन ही पिता गजेंद्र नाथ शुक्ला ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक बेलीपार क्षेत्र के मलाव गांव में भी डॉ. रविन्द्र पांडेय, ज्ञानेंद्र पांडेय, विकास पांडेय की मौत हुई है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं।
सगे भाइयों की मौत से सनसनी
भरोहिया विकास खंड के फरदहनी गांव के राजकुमार वर्मा व उनके बड़े भाई दुर्गेश वर्मा के निधन हो गया। चार भाइयों में से दो की मौत से सनसनी फैल
गई। सब दहशतजदा हो गए। पिपराइच क्षेत्र के लुहसी गांव में करीब आठ लोगों की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक खांसी, बुखार की दिक्कत के बाद कन्हैया (47), शैलेंद्र तिवारी (50), बिंदु यादव (52), आशिक अली (68), भल्लन यादव (70), अविनाश तिवारी (50), सना खातून (20), पतिया देवी (65), लवजारी (60) की मौत हुई है। इससे ग्रामीण डरे हुए हैं।
गौनर गांव में 22 मौतों के बाद जागे अफसर
सरदारनगर विकास खंड के गौनर गांव में बीस दिनों में 22 लोगों की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक मुन्नू सिंह (55), कौशल्या देवी (65), गुड्डी गुप्ता (32), सुमित्रा यादव (45), जहरुलनिशा (20), सुशील सिंह (36), बेइला देवी (65), रूगदी देवी (53), रामनाथ पासवान (50), रामनारायण पाण्डेय (68), राजकिशोर गुप्ता (60), रामसूरत यादव (70), छेदी पासवान (70), शिव कुमार यादव (25), राधिका देवी (58), सुखराम (70), जफरुन निशा (20), सुमित्रा
(45), लाल बहादुर (50), नरबदा देवी (70), पार्वती (70) ने दम तोड़ा है। गौनर में मौतों की जानकारी के बाद मुख्य विकास अधिकारी इंद्रजीत सिंह व क्षेत्रीय विधायक संगीता यादव भी पहुंची थी। इसके बाद कोरोना जांच का शिविर लगा था।
परिवार के तीन सदस्यों की मौत से सब कुछ बिखरा
चौरीचौरा तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत भैसही रामदत्त में बारह दिन के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक वरिष्ठ अधिवक्ता संजय कुमार उपाध्याय (50) ने 20 अप्रैल को एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा था। उनके निधन के आठवें दिन बाद यानी 28 अप्रैल को उनकी माता संयोगिता देवी (78) का भी निधन हो गया। एक सप्ताह के अंदर ही मां-बेटे की निधन से हड़कंप मच गया। इसके बाद सेवानिवृत शिक्षक व संजय के पिता रघुवंश उपाध्याय (80) का दो मई को निधन हो गया। इससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
क्षेत्र ने बड़ा डॉक्टर खोया
पीपीगंज क्षेत्र में भी कई लोगों की मौत हुई है। इसमें डॉ. एसएन पाठक नाम भी शामिल है। रामूघाट गांव के पूर्व प्रधान के बेटे आकाश उर्फ विक्रांत सिंह का भी निधन हुआ था। जानकारी के मुताबिक राजू अग्रहरी, ओम प्रकाश कसौधन, मोतीलाल अग्रहरी, दिग्विजय त्रिपाठी, शैलेश गुप्ता, अजय जायसवाल, सुरेश चौरसिया, विनोद सिंह, अफजल मिया, राजेंद्र छापड़िया व नयनसर के दिग्विजय त्रिपाठी की मौत भी हुई है।
खानिमपुर में सुविधा नहीं मिली
गीडा क्षेत्र के खानिमपुर में 25 दिन में खांसी, जुकाम व सांस लेने की दिक्कत वाले लोगों की मौत हुई है। इसमें रामानंद पाल (62), लहुरी पाल (70), मंजुला सिंह (45), रामजी पाल (70) का नाम शामिल हैं। तीन और महिलाओं की मौत हुई है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
पंचायत चुनाव से बिगड़े हालात
कुईं बाजार क्षेत्र के मलांव में भी मौतें हुई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत चुनाव की शुरुआत व उसके बाद दुर्गावती ओझा (65), पलटू चौधरी (85),
केशव ओझा (70), विश्राम कन्नौजिया (65), लालजी यादव (75), राममिलन कन्नौजिया (55) की मौत हुई है। कुईं बाजार के अब्दुल सत्तार (55), सुभग (70), राजपति देवी (60), जगदीश (54), अनिल (35), असौजी के श्रीराम (70), इसरावती देवी (50), हरदत्तपुर के साजिद (65), रहमान (68), बलिराम शर्मा (45) ने भी दम तोड़ा है। ज्यादातर बुखार, खांसी व जुकाम से पीड़ित थे।
नीबी गांव में डर का माहौल
झुमिला बाजार के नीबी गांव में भी मौतों से दहशत है। ग्रामीणों के मुताबिक सरिता देवी (60), कलया देवी (65), सुदर्शन (40), प्रभुनाथ यादव (70), प्रभुनाथ तिवारी (80), उर्मिला देवी (60), बजरंगी दुबे (45), गोपाल दत्त (58), रामनरायण तिवारी (65), अवध नारायण (52), सुरसती देवी (65), गीता देवी (50) की मृत्यु हो गई है। इसी तरह कोडार उर्फ बघोर गांव में बृजराज मौर्य (70), राम नेवास गौड़ (45),गोधन गौड़ (50), चूल्हा देवी (50), लवंगा देवी (52) की मौत हुई है।
बांसगांव नगर पंचायत भी अछूती नहीं
बांसगांव नगर पंचायत में पिछले 15 दिनों के भीतर कई लोगों की मौतें हुई हैं। इनमें अभिमन्यु सिंह (55),इन्द्रसेन सिंह (57), हीरा गुप्ता (50), कन्हैया गुप्ता (25), धीरे सिंह (55), का नाम शामिल है। खुर्द मऊ गांव में बुखार और खांसी से पीड़ित सत्या सिंह (50), विंदा यादव (65), भोनिया (70), बीरबल ने दम तोड़ा है।
राजगढ़ में भी मौत से मातम
गगहा विकास खंड के राजगढ़ गांव में 17 दिन के अंदर नौ लोगों की मौत हुई है। मृतकों में छोहड़ी देवी (70),इंद्राज गुप्ता (45), माधुरी देवी (61), गुलाबी देवी (66), हियात मोहम्मद (71), किशोरी (81), श्रीप्रकाश तिवारी (66), दुलारे शर्मा (87) और बलभा शरण पाठक (76) हैं। इसके बावजूद गांव में बेहतर इलाज या फिर जांच की व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच नहीं कराना चाहते हैं।
बुखार हुआ और चली गई जान
उनवल में 10 दिन के अंदर खांसी, जुकाम व सांस लेने में दिक्कत के बाद कई लोगों की मौत हुई है। इसमें विशाल नाथ पांडेय (45), जोखन पांडेय (90),
बाबूलाल गौङ (90), सुधा पांडेय (49), उस्मान अली शेख (58), जमशेद अंसारी (52), गिरिजा देवी (75), लालजी यादव (55), राजमती देवी (52), अनुराधा देवी (53), सोना देवी (62), झीनकी देवी सहित अन्य का नाम शामिल है।
20 दिनों में कई की मौत
जगदीशपुर गांव में पिछले बीस दिनों के दौरान इंद्रभूषण (40), शशिप्रभा मल्ल (36), राजकुमार जायसवाल (50), पवन कुमार (45), कलावती देवी (65), सुधा देवी (40) व लालदेई देवी (65) की मौत हुई है। इससे ग्रामीण दहशतजदा हैं।
मौत का कारण पता नहीं, कोरोना का भय
खोराबार के ग्रामसभा सनहां में एक सप्ताह (1 से 7 मई) के अंदर कई लोगों की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक हरिश्चंद्र (75), नेवासी (70), बब्बन (48), प्रकाश (60), जंगबहादुर (70), सपना (45), राजकुमारी (60), जगदीश (66), नरसिंह (45), प्रकाश (55), कोलाहल (75) की मौत हुई है। मौत किस कारण से हुई है यह नहीं पता है। इसके बावजूद कोरोना का भय है। मृतकों का राप्ती नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया गया है।
10 मौतों से सहमे ग्रामीण
उरुवा विकास खंड के बनकट गांव में 16 अप्रैल से 15 मई के बीच 10 लोगों की मौत हुई है। ग्रामीणों के मुताबिक अलग-अलग वजहों से मोहित (53), रामजतन (55), रिटायर्ड दरोगा प्रभाकर उपाध्याय (64), शारदा देवी (82), अरुण उपाध्याय (35), नूरजहां, रुक्मिना (85), मीरा देवी (40), प्रमोद यादव, वीरेंद्र उपाध्याय (50) का नाम शामिल है। इसके बावजूद गांव में कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं आए हैं।
सालिकराम मुहल्ले में भी मौतें
पादरीबाजार क्षेत्र के जंगल सालिक राम मुहल्ले में आशा देवी (62), अशोक कुमार (60), दिलदार (55), मुन्नीलाल (62), जोगिया देवी (50), विनय (55),
राजवंशी (50), लालू (64) व शिवपूजन (60) की मौत हुई है। ज्यादातर को तेज बुखार हुआ था।
मुड़िला में बाप-बेटे की मौत
भटहट विकास खंड के सोनराईच उर्फ बड़ागांव में भी कई मौतें हुई हैं। गांव के पूर्व ग्राम प्रधान जवाहर चौहान ने बताया कि चंद्रावती देवी (65), कौशल्या
(60), बच्चन यादव (75), राम ललित कनौजिया (65), शंकर नाई (70), शंकर चौहान (65), कन्हैया (55), राधा (65) ने दम तोड़ा है। इसी क्षेत्र की मुड़िला गांव में अनिरुद्ध श्रीवास्तव व उनके बेटे अनिकेत श्रीवास्तव ने भी दम तोड़ा है।
खुटभार गांव में मौत से दहशत
चिल्लूपार के खुटभार गांव में ही एक पखवाड़े में वाचस्पति देवी (70), राधिका देवी (22), सदाफल यादव (60), फूलवासी (65), सोनमती (60), श्रीराम साहनी (55), बसंती (60), सामरती (55), रामजी पासवान (60), कुसुम गुप्ता (32), रामचंद्र यादव (60), केदार गुप्ता (65), झिनकन सोनकर (55) की मौत हुई है। तमाम लोग खांसी, जुकाम व बुखार की चपेट में हैं। क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिश्रौली है लेकिन 15 महीने से चिकित्सक की तैनाती नहीं
है। दवा मिलने में भी दिक्कत होती है। बुखार की दवा तक को कई दुकानों पर ढूंढना पड़ता है।
निगरानी समिति भी सक्रिय की गई
गोरखपुर मंडल के कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने बताया कि गांवों में निगरानी समितियों को सक्रिय किया गया है। प्राथमिकता पर दवाओं की किट बांटी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण न फैले, इस दिशा में काम चल रहा है। मृत्यु दर कम करने और संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं। इस बार गंभीर मरीजों की संख्या ज्यादा है। गोरखपुर मंडल में ऑक्सीजन व आईसीयू बेडों की संख्या बढ़ाकर तीन हजार की गई है। ऑक्सीजन आपूर्ति की व्यवस्था भी ठीक है। 15 स्थानों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित कराई गई है। कालाबाजारी व अस्पतालों में मनमानी शुल्क वसूली पर शिकंजा कसा गया है।