विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह पर छात्रों को तनाव प्रबंधन के प्रति किया जागरूक
गोरखपुर। एम्स में बुधवार से शुरू हुए विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के पहले दिन मनोचिकित्सा विभाग की ओर से छात्रों के लिए आत्महत्या रोकथाम पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। वक्ताओं ने ‘आत्महत्या पर दृष्टिकोण बदलना’ विषय पर बताया कि आत्महत्या जैसी घटनाएं रोकने के लिए तनाव प्रबंधन सबसे जरूरी है।
कार्यक्रम का उद्घाटन एम्स के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. डॉ. हेमंत कुमार व कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता (सेवानिवृत्त) ने किया। दोनों ने छात्रों को तनाव प्रबंधन के उपाय अपनाने और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। साथ ही छात्रों में उच्च जोखिम वाले आत्मघाती व्यवहार के प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की गई।
कार्यशाला में स्नातक चिकित्सा और नर्सिंग छात्रों के साथ वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भाग लिया। इनमें आत्महत्या रोकथाम पर जागरूकता बढ़ाने वाली गतिविधियां शामिल थीं। छात्रों ने ‘सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव’ विषय पर चर्चा की। वहीं, नर्सिंग छात्रों ने रोल प्ले और स्क्रिप्ट के माध्यम से आत्महत्या के चेतावनी संकेतों, हस्तक्षेप के उपायों और संकट के दौरान मदद पाने के तरीकों पर प्रकाश डाला।
इसके अलावा भावनात्मक समस्याओं से जूझ रहे छात्रों की चुनौतियों को दर्शाने वाली लघु फिल्म दिखाई गई, जिसके बाद संवादात्मक चर्चा ने माहौल को और भी प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों को एम्स के टेलीमानस और मनोदय छात्र परामर्श सेल जैसी हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी दी गई, जो जरूरतमंद छात्रों को पेशेवर परामर्श उपलब्ध कराती है।