घर से स्टेडियम तक जाने के लिए न ही उनके पास कोई साधन होता था और न ही पैसे होते थे, ऐसे में स्टेडियम जाने के लिए या तो लोगों से लिफ्ट मांगा करते थे, या पैदल ही स्टेडियम चले जाते जाते थे। बताया कि उन्होंने कभी भी हॉकी या जूते अपने पैसे से नहीं खरीदे क्योंकि उनके परिवार की स्थित ऐसी नहीं थी कि वह उन्हें हॉकी या जूते दिला सकें। कोच और खेल प्रेमियों की मदद से ही उन्हें हॉकी या जूते मिल पाते थे।
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आदित्य ने बताया कि यहां से 2014 में उनका चयन स्पोर्टस कॉलेज लखनऊ के लिए हुआ। कोच विकास पाल की देखरेख में अभ्यास किया। पहली बार 2016 में आयोजित सब जूनियर नेशनल खेला। इसके बाद उनका चयन हॉकी इंडिया के नेशनल एकेडमी दिल्ली में हुआ।
यहां रहते हुए उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेते हुए हुए मेडल जीते, लेकिन उनका चयन भारतीय टीम में नहीं हो सका। इस वर्ष जनवरी में बंगलुरु नेशनल कैंप में हुआ, यहां से उनका चयन जूनियर वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में हुआ है।