किराएदार के रूप में छिपकर बड़ी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश का खुलासा कई बार होने के बाद भी गोरखपुर पुलिस सतर्क नहीं है। शहर के विभिन्न इलाकों में किराएदार रहते हैं, सेकिन उनका सत्यापन करने के लिए पुलि नहीं जाती हैं।
वहीं सत्यापन अनिवार्य होने के बावजूद मकान मालिक किराएदारों की पूरी जानकारी नहीं लेते हैं। यह हाल तब है जब एडीजी जोन अखिल कुमार ने इसे लेकर कुछ महीने पहले ही आदेश भी जारी किया था। अब लखनऊ में आतंकी के पकड़े जाने के बाद फिर अफसरों ने पुलिस को सचेत किया है। वहीं एडीजी ने जोन के सभी पुलिस कप्तान से किराएदारों के सत्यापन की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
जानकारी के मुताबिक, किराएदार रखने पर मकान मालिक को उसकी पूरी जानकारी लेनी होती है। पहचान पत्र लेकर थाने, चौकी में जमा कराना होता है, ताकि उसका सत्यापन हो सके। गोरखपुर में इस पर कभी गंभीरता से काम नहीं हुआ। जब कभी अफसरों ने सख्ती की तो इस पर कुछ दिन काम होता है, लेकिन ठंडे बस्ते में डल दिया जाता है।
अभी लखनऊ में जो दो आतंकी पकड़े गए हैं, इसमें से एक आतंकी किराए के मकान में रहताल था। इसके साथ ही गोरखपुर में दो बार आईएसआई के एजेंट पकड़े जा चुके हैं, जो किराए के मकान में ही रहते थे। किराएदारों के सत्यापन के लिए एडीजी जोन गोरखपुर के अखिल कुमार ने पुलिस वालों को आदेश जारील किया था कि बीट सिपाही अपने-अपने इलाके में मकान मालिक से संपर्क कर ब्योरा ले लें, ताकि उसका सत्यापन हो सके, लेकिन उनके इस आदेश को कुछ ही समय अमल में लाया गया। अब लखनऊ में आतंकी पकड़े जाने के बाद एडीजी ने दोबारा अपने आदेश को दोहराते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
नेपाल से जुड़ा है गोरखपुर
केस-1
04 मार्च 2015: लखनऊ में आईएसआई से जुड़े शेख जावेद इकबाल उर्फ अश्फाक अंसारी को गोरखपुर एटीएस ने पकड़ा था। तब पता चला था कि उसकी रिश्तेदारी पाकिस्तान में थी और वह नकली नोट का कारोबार करता था। इस दौरान वह लंबे समय तक गोरखपुर के तिवारीपुर इलाके में किराएदार बनकर रहता था।
केस-2
नवबंर 2018: गोरखपुर के हनीफ नाम के शख्स को एटीएस ने पकड़ा था। जांच में पता चला था कि 2014 से 2018 के बीच वह कई बार अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए पाकिस्तान बी गया था। उसके पास गोरखपुर एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन की तमाम वीडियो और फोटो थी, जिसे उसने हटा दिया था। इस वजह से बच गया था।
एडीजी जोन अखिल कुमार ने बताया कि किराएदारों के सत्यापन को लेकर एक बार फिर अफसरों को निर्देशित किया गया है। पुलिस ने अब तक कितने किराएदारों का सत्यापन किया है, इसकी रिपोर्ट जोन के हर जिले से मांगी गई है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं होगी। लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई होगी।
गोरखपुर के रास्ते नेपाल जाने के कई रास्ते हैं। इस वजह से यह इलाका संवेदनशील है। पुलिस और एसएसबी ने जब भी सख्ती की तो बार्डर से कई बार संदिग्ध पकड़े गए। दिल्ली में पकड़े गए कई आतंकी भी गोरखपुर के रास्ते का इस्तेमाल कर चुके हैं।
नेपाल सीमा से पकड़े गए आतंकी
1991: खालिस्तान का डिप्टी कमांडर सुखबीर सिंह।
1991: बढ़नी सीमा परखलीस्तान लिबरेशन फ्रंट के भगा सिंह और अजमेर सिंह।
1993: आतंकी टाइगर मेमन।
1995: आईएसआई एजेंट यासिया बेगम।
2000: आसिम अली और चार आतंकी।
2007: लश्कर का आतंकी सादात रशीद मसूद आलम।
2009: मुंबई के आतंकी नूरबक्स और इश्तियाक।
2013: पाकिस्तान से भारत में आते समय लियाकत अली शाह पकड़ा गया था।