गोल्फ खिलाड़ी दीक्षा डागर।
- फोटो : अमर उजाला।
गोल्फ खिलाड़ी दीक्षा डागर।
छह साल की उम्र से खेल रहीं गोल्फ
दीक्षा छह साल की उम्र से ही गोल्फ खेल रही हैं। वह सुनने में अक्षम हैं, लेकिन अपनी प्रतिभा की गूंज से उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। दीक्षा डागर भारत की प्रतिष्ठित महिला गोल्फरों की विशिष्ट श्रेणी में हैं। पिता नरेंद्र डागर के अनुसार, 12 साल की उम्र में ही दीक्षा ने नेशनल खेल लिया। 2015 में उन्होंने पहली बार भारत का प्रतिनिधित्व किया। जब वह 18 साल की थीं तब उन्होंने साउथ अफ्रीकन ओपन का खिताब अपने नाम किया।
2020 के टोक्यो ओलंपिक में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और अब 2024 में पैरिस ओलंपिक के लिए भी लगभग क्वालिफाई कर लिया है। 2023 में दीक्षा ने अभी तक 22 देशों में आयोजित 29 प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
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गोल्फर खिलाड़ी दीक्षा के पिता कर्नल नरेंद्र डागर।
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माता-पिता ने दिया माहौल और मार्गदर्शन
पिता कर्नल नरेंद्र डागर खुद पूर्व गोल्फर रहे हैं और उन्होंने ही दीक्षा का मार्गदर्शन किया है। एक ऐसा माहौल तैयार किया, जिससे गोल्फ और अन्य खेलों के प्रति उसके जुनून को बढ़ावा मिला। दो साल पहले जब वह गोरखपुर आए तब दीक्षा ने रेलवे गोल्फ क्लब की सदस्यता ली और यहां प्रैक्टिस करने लगीं। जब भी दीक्षा किसी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करती हैं तो उनकी मां सुनीता डागर हमेशा उनके साथ रहती हैं। भाई योगेश डागर भी गोल्फ के खिलाड़ी हैं और डेफ ओलंपिक में प्रतिभाग कर चुके हैं।