गीडा के उद्यमी काफी समय से बिजली कटौती से परेशान हैं। इसकी वजह से न सिर्फ उनका उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि आर्थिक रूप से भी उन्हें नुकसान झेलना पड़ता है। बिजली विभाग का रवैया उन्हें और दुखी कर रहा है क्योंकि जब उद्यमी अपनी परेशानी बिजली विभाग के अधिकारियों को बताते हैं तो अधिकारी उन्हें जेनरेटर लगाने का सुझाव देने लगते हैं। ऐसे में उद्यमियों का कहना है कि अगर यही करना होता तो गीडा में आकर उद्योग क्यों लगाते।
दरअसल गीडा औद्योगिक क्षेत्र को बिजली कटौती से मुक्त रखा गया है। इसके बाद भी गीडा की फैक्ट्रियों की बिजली बार-बार कटती है। इस संबंध में कई बाद बिजली विभाग से शिकायत की गई है लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। उद्यमी लगातार समस्याएं झेल रहे हैं।
फेथफुल कमर्शियल लिमिटेड के सुमित रुंगटा ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र होने की वजह से हमें शासन प्रशासन की ओर से कई सुविधाएं मिली हुई हैं। 24 घंटे बिजली की आपूर्ति इनमें से एक है। इसके बावजूद हम बिजली कटौती की मार झेल रहे हैं। इसकी वजह से न सिर्फ हम लोगों को काफी ज्यादा परेशानी होती है बल्कि आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। मेरी फैक्ट्री की मशीन फ़ूड ग्रेड हेक्सगेन से चलती है। बिजली जाने पर दुबारा मशीन शुरू होने में हेक्सगेन का फ्लो रुक जाता है और दुबारा साइकल में आने में काफी नुकसान हो जाता है।
बंसल इंडस्ट्रीज के राहुल बंसल ने बताया कि हमारी सोया बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। सोया बड़ी एस्ट्रोजन प्रोसेस से तैयार होती है। इस प्रोसेस के दौरान यदि एक सेकेंड के लिए भी बिजली बाधित हो जाए तो यूनिट को दो घंटों का नुक़सान होता है क्योंकि ये हाई प्रेशर मशीन है। एक सेकंड के लिए भी बिजली कट जाने से सारा का सारा कच्चा माल डाई पर आकर जम जाता है और जब तक बिजली दोबारा चालू न हो तब तक मशीन को खोला भी नहीं जा सकता है। मशीन को दोबारा खोलने बांधने में एक डेढ़ घंटे का समय लग जाता है। अत: एक सेकेंड की बिजली कटौती भी हमारी यूनिट को दो घंटे का नुक़सान कर जाती है।