विश्व में सबसे अधिक धार्मिक पुस्तकों का उत्पादक गीताप्रेस दो महीने से भी ज्यादा समय से बंद है। लॉकडाउन चार में इसे प्रशासन की ओर से खोलने की अनुमति मिल चुकी है। बावजूद इसके प्रबंधन अभी इसे खोलने पर असमर्थता जाहिर कर रहा है।
गीताप्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि गीताप्रेस को खोले जाने की अनुमति प्रशासन से लॉकडाउन चार के शुरुआत में ही मिल चुकी है। लेकिन सिर्फ प्रेस खुल जाने से ही उत्पादन शुरू नहीं हो जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रेस खुलने के बाद सबसे बड़ी समस्या कर्मचारियों की आएगी। उन्होंने बताया कि गीताप्रेस के अधिकतर कर्मचारी ग्रामीण अंचलों से आकर यहां काम करते हैं। लॉकडाउन के कारण कोई भी सार्वजनिक साधन नहीं चल रहे हैं। अगर वह किसी तरह यहां आने की कोशिश भी करें तो उनके यहां तक पहुंचने में पास बाधा बनेगी।
इसके साथ ही पुस्तकें छापने के लिए कागज, गोंद, रंग आदि सामग्री की जरूरत पड़ती है ऐसे में लॉकडाउन में उनकी उपलब्धता भी चुनौती बनेगी और अगर किसी तरह किताबें छप भी गई तो उनका होगा क्या। सप्लाई में तमाम तरह की बाधाएं सामने आएंगी।
उन्होंने बताया कि इन सभी चुनौतियों के कारण अभी तक नहीं खोला जा सका है। जल्द ही बैठक कर इन सभी चुनौतियों से निपटने का तरीका निकाला जाएगा।