तैयार किया जा रहा आरएफपी
सहायक अभियंता जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि मोविंग बेस्ड बायोलाजिकल रिएक्टर (एमबीबीआर) तकनीकी से कम क्षेत्रफल में स्थापित होने वाले इस एसटीपी से इन घरों से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित किया जा सकेगा। इसके लिए रिक्वेस्ट फार प्रपोजल (आरएफपी) तैयार किया जा रहा है। जो कंपनी इसे लगाएगी, उसे 10 साल तक अनुरक्षण भी करना होगा।
इस पूरे क्षेत्र की सीवर लाइन को इससे जोड़ा जाएगा। इसमें तृतीयक शोधन होगा। यानी सीवेज से नाइट्रेट व फास्फेट भी पूरी तरह से निकल जाएगा। अगले तीन साल में यह प्लांट संचालित होने लगेगा। शोधन के बाद निकलने वाले पानी से सिंचाई की जाएगी और इसमें ऐसी तकनीक होगी, जिससे ठोस अपशिष्ट से खाद भी बन सके।
लेक व्यू अपार्टमेंट में प्लांट
इससे पहले जीडीए ने तारामंडल स्थित लेक व्यू अपार्टमेंट में 120 केएलडी का प्लांट लगाया है। इस पूरे क्षेत्र से बरसात का पानी निकालने के लिए चिलुआताल तक नाला बनाया जाएगा।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि शहर के राप्तीनगर क्षेत्र में एसटीपी लगाया जाएगा। यह प्लांट इस क्षेत्र के मोहल्लों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी का शोधन करेगा। इसपर करीब 26 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।