मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में पहुंचा था मामला
पुलिस ने कैंट थाने में गंभीर धाराओं में दर्ज छह मुकदमों को गैंगस्टर का आधार बनाया था। इससे पहले मोहद्दीपुर चारफाटक रोड निवासी ओम प्रकाश पांडेय की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची थी। पांच अगस्त 2021 को जनता दरबार में आई कैंट इलाके की बिंदू ने ओम प्रकाश की सारी करतूत मुख्यमंत्री को बताई थी। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में पुलिस व प्रशासनिक अफसरों से पूछा था कि अब भी भू माफिया हैं? इसी का नतीजा रहा कि पुलिस ने भू माफिया पर शिकंजा कस दिया। जिन लोगों ने भी ओम प्रकाश के खिलाफ तहरीर दी, उसपर मुकदमा दर्ज हुआ।
रामगढ़ताल पुलिस ने की गैंगस्टर की कार्रवाई
रामगढ़ताल पुलिस ने ओम प्रकाश के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट की भी कार्रवाई की। गिरफ्तारी के बाद रामगढ़ताल पुलिस ने भू माफिया की संपत्ति को जब्त करने के लिए जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजी थी। जिलाधिकारी ने आर्थिक अपराध कारित करके अर्जित की संपत्ति को जब्त करने का आदेश जारी किया था।
23 अगस्त को दर्ज हुआ था गैंगस्टर का केस
जिलाधिकारी की मंजूरी के बाद 23 अगस्त को तत्कालीन कैंट इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने ओमप्रकाश के अलावा सनी देवल, धीरज साहनी, संजय पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की थी। तभी से वह भागा था। फरवरी 2022 में गिरफ्तारी हुई थी।
पांच महीने में भू माफिया पर 28 केस दर्ज
पांच महीने के अंदर ही कैंट समेत शहर के अलग-अलग थानों में ओम प्रकाश पांडेय के खिलाफ जालसाजी के 28 केस दर्ज किए गए थे। 30 अगस्त को सेवानिवृत्त सैन्य कर्मी मनीष कुमार मिश्रा ने केस दर्ज कराया था। कुशीनगर के कसया क्षेत्र के वरवा सुकदेव निवासी दुर्गावती, रमेश मिश्रा, किरन राय, लक्ष्मीपुर बुजुर्ग निवासी अलका पांडेय, कुबेरस्थान के सिंहन, जोड़ी निवासी मंजू और कोहरवलिया निवासी मीरा ने केस दर्ज कराया था। देवरिया की संगीता व बिहार के कुछ लोगों ने केस दर्ज कराया था।
एसएसपी ने गठित की टीम, दिल्ली से हुई थी गिरफ्तारी
एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। साथ ही एसपी सिटी सोनम कुमार के नेतृत्व में टीम गठित करके गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था। ओम प्रकाश की लोकेशन राजस्थान में मिली थी। बाद में कैंट पुलिस ने दिल्ली के एक रिश्तेदार के घर से उसे गिरफ्तार कर लिया था।