गोरखपुर महानगर में गणेश चतुर्थी पर गणेश उत्सव का शुभारंभ धूमधाम से किया गया। 10 दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव की शुरुआत के पहले दिन शुक्रवार को घरों और मंदिरों में विघ्न विनाशक श्री गणेश की आराधना की गई। घरों और मंदिरों के बाहर, हर तरफ गणपति बप्पा मोरिया, मंगल मूर्ति मोरिया की गूंज सुनाई दे रही थी। पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना के कारण सार्वजनिक जगहों पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई। श्रद्धालुओं ने घरों और दुकानों में छोटी मूर्तियां स्थापित की हैं।
श्रीगणेश से की ज्ञान व ऐश्वर्य की कामना
शुक्रवार सुबह से ही माहौल भक्तिमय रहा। गणेश चतुर्थी पर्व पर श्रद्धालुओं ने घरों में और मंदिरों में विशेष पूजा की। भक्तों ने घरों में गणेश जी की प्रतिमा को गंगाजल के साथ स्नान कराकर लाल वस्त्र धारण कराए। उसके बाद पूजन-अर्चन कर पुष्प, गन्ना, मोदक, मखाना, केला, सिंदूर, जनेऊ आदि भगवान को अर्पित किया। कई जगहों पर शुभ मुहूर्त में दोपहर के समय पूजन-अर्चन किया गया और ज्ञान व ऐश्वर्य की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने चंद्र दर्शन से परहेज किया।
19 को होगा प्रतिमा विसर्जन
घासीकटरा, पांडेयहाता, कच्ची बाग व धर्मशाला आदि जगहों पर भगवान गणेश की मूर्तियां स्थापित की गई हैं। कुछ जगहों पर बृहस्पतिवार को ही भगवान गणेश की मूर्तियां तो कुछ जगहों पर शुक्रवार की सुबह मूर्तियां स्थापित की गईं। शाम को शुभ मुहूर्त में मूर्ति के पट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले गए। 19 सितंबर को चतुर्दशी पर भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा।
मुंबई से मंगाई गई गणेश प्रतिमा
गोरखपुर गणपति महोत्सव, घासीकटरा के समिति के मंत्री पंकज गुप्ता के घासीकटरा चौराहा स्थित आवास पर लगातार दूसरे वर्ष भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की गई है। शुक्रवार शाम शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर प्राण प्रतिष्ठा की गई। अध्यक्ष सुधाकर मोदनवाल ने बताया कि छह फीट ऊंची यह मूर्ति मुंबई से मंगाई गई है। हर वर्ष मुंबई से ही मूर्ति आती है। कोरोना काल से पहले दुर्गा मंदिर, घासीकटरा में भव्य गणपति महोत्सव मनाया जाता था।